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आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं को दिया अंतिम अवसर, दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश

दिल्ली आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद
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दिल्ली आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले भी कई मौके दिए जा चुके हैं और अब आगे अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित की गई है।

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    यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें सीबीआई ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया था। हाईकोर्ट में सीबीआई का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। दूसरी ओर, आरोपित नेताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है ताकि अदालत सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई कर सके।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने कहा कि संबंधित नेताओं की ओर से अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है, जबकि पहले भी कई अवसर दिए जा चुके हैं। अदालत ने कहा कि न्यायहित में अंतिम बार दो सप्ताह का समय दिया जा रहा है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ा सकती है।

    इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने मामले को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे अदालत में तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करती है और अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। पार्टी नेताओं का दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और न्यायपालिका के समक्ष उनका पक्ष स्पष्ट किया जाएगा।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा दिया गया यह आदेश केवल प्रक्रिया से संबंधित है और इससे किसी भी पक्ष के दोषी या निर्दोष होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उनका कहना है कि अदालत का उद्देश्य सभी पक्षों को पर्याप्त अवसर देकर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है। अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली की राजनीति में आबकारी नीति मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत की प्रत्येक सुनवाई पर राजनीतिक दलों की नजर रहती है और उसके बाद बयानबाजी भी तेज हो जाती है। हालांकि अंतिम निर्णय पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम समय दिया है। इसके बाद निर्धारित तिथि पर अदालत सीबीआई की याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगी। सभी पक्षों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।

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