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उत्तराखंड बजट 2026-27: ₹1.20 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है बजट, गैरजरूरी योजनाओं पर लग सकती है कैंची

उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर मंथन तेज कर दिया है। बजट को अंतिम रूप देने
उत्तराखंड बजट 2026-27: ₹1.20 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है बजट, गैरजरूरी योजनाओं पर लग सकती है कैंची


उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर मंथन तेज कर दिया है। बजट को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 7 फरवरी को चंपावत जिले के बनबसा में किसानों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों के साथ सीधा संवाद करेंगे। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद लोगों की जमीनी जरूरतों को सीधे बजट प्रस्तावों में शामिल करना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बार उत्तराखंड का बजट आकार बढ़कर करीब ₹1.15 से ₹1.20 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह धामी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा, जिसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम आर्थिक दस्तावेज माना जा रहा है।

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    बजट बढ़ेगा, लेकिन खर्च पर रहेगी लगाम

    हालांकि सरकार सिर्फ बजट का आकार बढ़ाने के मूड में नहीं है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिए हैं कि पुरानी, कम प्रभावी और अनुपयोगी योजनाओं की पहचान कर उन्हें बंद करने के प्रस्ताव लाए जाएं। किसी भी नई योजना के लिए ठोस तर्क और वित्तीय औचित्य जरूरी होगा। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का कुल बजट लगभग ₹1.01 लाख करोड़ था। इसमें से कर्ज अदायगी को छोड़कर वास्तविक खर्च करीब ₹75 हजार करोड़ के आसपास रहा। बीते कुछ वर्षों में बजट में औसतन 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, इसी आधार पर 2026-27 में बजट के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    खर्च और आय के बीच असंतुलन से बदली रणनीति

    सरकार की टैक्स आय में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन वह बढ़ते खर्च के मुकाबले पर्याप्त नहीं मानी जा रही। केंद्र से मिलने वाले अनुदान और कर्ज पर निर्भरता बनी रहने के कारण वित्तीय संतुलन को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। इसी वजह से इस बार विभागों से सिर्फ खर्च का प्रस्ताव नहीं, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि उन्होंने राजस्व बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किए। गैर-कर राजस्व, फीस संरचना और टैक्स दरों की समीक्षा भी बजट रणनीति का हिस्सा है।

    जीरो बेस्ड बजटिंग: हर योजना होगी कसौटी पर

    2026-27 का बजट ‘जीरो बेस्ड बजटिंग’ के सिद्धांत पर तैयार किया जा रहा है। इसका साफ मतलब है कि कोई भी योजना सिर्फ इसलिए जारी नहीं रहेगी क्योंकि वह पहले से चल रही है। हर योजना को अपनी उपयोगिता और जरूरत दोबारा साबित करनी होगी। वित्त विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि कई योजनाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जा सकता है। पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे अनिवार्य खर्च बढ़ने के बीच सरकार नई प्राथमिकताओं के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

    7 फरवरी को पहला ‘बजट संवाद’

    वित्त सचिव दिलीप जावलकर द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहला बजट संवाद 7 फरवरी को सुबह 11:30 बजे बनबसा स्थित एसटीपीसी गेस्ट हाउस (टनकपुर) में आयोजित होगा। इसमें करीब 200 प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें जिला पंचायत प्रतिनिधि, नगर निकाय सदस्य, स्वयं सहायता समूह, प्रगतिशील किसान, उद्योगपति, होटल व्यवसायी और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल रहेंगे। सरकार का कहना है कि इस बार बजट सिर्फ फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता की भागीदारी से तैयार किया जाएगा।

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