Last updated: January 27th, 2026 at 09:57 am
उत्तराखंड समेत देशभर में बैंक कर्मचारी पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर एक दिवसीय हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर प्रदेश की बैंकिंग व्यवस्था पर पड़ा है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी और उत्तरकाशी सहित कई जिलों में बैंक शाखाओं के शटर डाउन रहे, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदेश में सार्वजनिक, निजी और ग्रामीण बैंकों की 7 हजार से अधिक शाखाएं बंद रहीं। नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट और अन्य शाखा आधारित सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हुईं। अनुमान है कि उत्तराखंड में करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए, जिससे एक ही दिन में करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा।
सड़कों पर उतरे बैंककर्मी
अपनी मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी सड़कों पर भी नजर आए। देहरादून में कर्मचारियों ने एस्लेहॉल से घंटाघर तक मार्च निकालकर प्रदर्शन किया, जबकि हरिद्वार और अन्य शहरों में भी बैंक शाखाओं के बाहर नारेबाजी की गई। कर्मचारियों ने साफ कहा कि जब तक 5-डे वर्किंग सिस्टम लागू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्राहक हुए परेशान
बैंक बंद मिलने से कई ग्राहक निराश लौटते दिखे। देहरादून में ग्राहक को चेक जमा कराने आए थे, लेकिन बैंक पर ताला लटका मिला। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें हड़ताल की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, जिससे उनका जरूरी काम अटक गया।
क्या है कर्मचारियों की मुख्य मांग
बैंक कर्मचारी लंबे समय से सभी शनिवार और रविवार को अवकाश घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा छह दिवसीय कार्य प्रणाली से कार्यभार बढ़ गया है, जिससे कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन (IBA) पहले ही इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दे चुका है, लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण फैसला लटका हुआ है।
यूनियनों का आरोप – समझौते के बाद भी नहीं हुआ अमल
उत्तरांचल बैंक एम्प्लॉईज यूनियन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 11वें द्विपक्षीय समझौते में 5-डे वर्किंग को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया।
भेदभाव का मुद्दा भी उठा
बैंककर्मियों ने कहा कि जब RBI, LIC, GIC और सरकारी कार्यालयों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है, तो बैंकों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी शाखाओं में छह दिन काम कराना तर्कसंगत नहीं है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले आंदोलन
यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर हुई, जिसमें देशभर की 9 प्रमुख बैंक यूनियनें शामिल हैं। यूनियनों के अनुसार, पूरे देश में लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल का हिस्सा बने।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। इससे बैंकिंग सेवाएं लंबे समय तक प्रभावित हो सकती हैं।
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