Last updated: January 30th, 2026 at 08:09 am
देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत उत्तराखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले की गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में चलाए जा रहे बीएलओ आउटरीच अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस चरण में राज्य के करीब 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के मार्गदर्शन में यह अभियान प्रदेश के हर मतदाता तक पहुंचने, उनसे संवाद स्थापित करने और मतदाता सूची को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में चला अभियान
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने जानकारी दी कि प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर बीएलओ, ईआरओ और निर्वाचन तंत्र से जुड़े अधिकारियों ने समन्वित प्रयासों से अभियान को अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि पहले चरण में उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली, जिसके चलते तीन-चौथाई मतदाताओं की सफल मैपिंग की जा सकी।
1 फरवरी से दूसरा चरण, युवाओं और महिलाओं पर रहेगा फोकस
बीएलओ आउटरीच अभियान का दूसरा चरण 1 फरवरी से शुरू किया जाएगा, जो 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस चरण में विशेष रूप से युवा मतदाताओं और महिला मतदाताओं को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि अधिकतम मतदाताओं का सत्यापन और संवाद सुनिश्चित किया जा सकता है।
2003 की मतदाता सूची ऑनलाइन उपलब्ध
निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्री-एसआईआर चरण में वर्तमान मतदाता सूची को वर्ष 2003 की सूची से जोड़ा जा रहा है। मतदाता मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड की वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर जाकर अपने विधानसभा क्षेत्र, नाम, पिता या पति के नाम, गली-मोहल्ले या क्षेत्र के नाम के आधार पर अपना विवरण आसानी से खोज सकते हैं। इससे मतदाता क्रमांक और बूथ से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
राजनीतिक दलों से बीएलए नियुक्ति की अपील
निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का आग्रह किया है। वर्तमान में राज्य में 12,070 बीएलए की नियुक्ति हो चुकी है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों से शत-प्रतिशत बीएलए नियुक्त करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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