Last updated: September 8th, 2026 at 03:25 pm

उत्तर प्रदेश सरकार 7+1 सीट तक की क्षमता वाले निजी वाहनों के लिए सालाना फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को वापस लेने की तैयारी कर रही है। लंबे समय से वाहन मालिकों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी। अब परिवहन विभाग ने पुराने आदेश को वापस लेने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों के पास भेजा है। अंतिम आदेश जारी होने के बाद नई व्यवस्था लागू होगी।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त आरके विश्वकर्मा के अनुसार, जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए पुराने आदेश को वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेज दिया गया है और अंतिम आदेश जारी होने का इंतजार है।
इस बदलाव का सीधा असर उन निजी वाहनों पर पड़ेगा जिनमें चालक समेत 7+1 तक लोगों के बैठने की क्षमता है। इस श्रेणी में कई सामान्य निजी कारें, एमपीवी और बड़ी एसयूवी शामिल हो सकती हैं। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य निजी वाहन मालिकों पर पड़ने वाली अतिरिक्त औपचारिकताओं को कम करना है।
मामले की अहम बात यह है कि मौजूदा व्यवस्था को लेकर वाहन मालिकों में काफी भ्रम रहा है। निजी और व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस नियम अलग होते हैं। सामान्य निजी वाहनों के लिए शुरुआती 15 वर्षों तक फिटनेस की अलग वार्षिक प्रक्रिया सामान्य तौर पर लागू नहीं होती। पंजीकरण अवधि पूरी होने के बाद आरसी नवीनीकरण के समय वाहन की फिटनेस जांच की जाती है। इसके विपरीत परिवहन और व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग फिटनेस नियम लागू होते हैं।
उत्तर प्रदेश में 7+1 क्षमता वाले निजी वाहनों को लेकर सालाना फिटनेस से जुड़ी व्यवस्था ने वाहन मालिकों के बीच अतिरिक्त प्रक्रिया और खर्च को लेकर चिंता पैदा की थी। वाहन मालिकों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से नियम को सरल बनाने की मांग की थी। अब विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद इस दिशा में बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है।
हालांकि, जब तक अंतिम सरकारी आदेश जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त मानना सही नहीं होगा। वाहन मालिकों को अपने वाहन की आरसी, पंजीकरण श्रेणी और स्थानीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार ही जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
परिवहन विभाग के इस कदम को निजी वाहन मालिकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे परिवार जिनके पास बड़ी क्षमता वाली निजी कारें हैं, उन्हें सालाना फिटनेस प्रक्रिया से जुड़ी अतिरिक्त परेशानी कम होने की उम्मीद है।
विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अब अंतिम निर्णय उच्च स्तर पर होना है। मंजूरी मिलने पर संबंधित आदेश जारी किया जाएगा और उसके बाद आरटीओ कार्यालयों में नियमों के अनुसार प्रक्रिया बदली जा सकती है।
निजी वाहनों की सुरक्षा और सड़क पर उनकी स्थिति की जांच का उद्देश्य हालांकि बना रहेगा। फिटनेस से जुड़ी किसी भी छूट का मतलब यह नहीं होगा कि वाहन मालिक वाहन की खराब स्थिति में उसे सड़क पर चलाने के लिए स्वतंत्र होंगे। वाहन की वैध आरसी, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की शर्तें अपनी जगह लागू रहेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव से 7+1 सीट वाले निजी वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर अंतिम सरकारी आदेश पर है। आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था कब से लागू होगी और किन-किन वाहनों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
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