Last updated: February 4th, 2026 at 09:10 am
उत्तराखंड के बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। परियोजना से जुड़े विद्युत और सिग्नलिंग सिस्टम का काम अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है, जिससे इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन को अंतिम चरण की ओर ले जाने की तैयारी तेज हो गई है।
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने मंगलवार को परियोजना से जुड़े प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों, सुरंगों और पुलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय उपायों की समीक्षा की।
परियोजना पूरी होने पर ढाई घंटे में कर्णप्रयाग
रेल परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी ट्रेन से मात्र 2.5 घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे चारधाम यात्रा, स्थानीय आवाजाही और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। निरीक्षण के दौरान आरवीएनएल के सीएमडी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को दिसंबर 2028 से पहले हर हाल में पूरा किया जाए और सभी तकनीकी एवं पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन हो।
मई से शुरू होगा स्टेशनों का निर्माण
आरवीएनएल के अनुसार, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धार देवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग में प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों का निर्माण कार्य मई महीने से शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही ट्रैक बिछाने और अन्य सहायक कार्यों को भी गति दी जा रही है।
हिमालयी क्षेत्र में कठिन काम, श्रमिकों की सराहना
दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन सीएमडी ने टनलिंग कार्य, पुल निर्माण और तकनीकी प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों के समर्पण की सराहना की और कहा कि यह परियोजना तकनीकी कौशल और मानवीय साहस का उदाहरण है।
पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर
आरवीएनएल ने साफ किया है कि निर्माण कार्य से हुए पर्यावरणीय प्रभावों की भरपाई के लिए वृहद पौधारोपण और हरित क्षेत्र विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना है।
अब तक की प्रमुख उपलब्धियां
वीरभद्र-योग नगरी ऋषिकेश (5.7 किमी) सेक्शन पर 2020 से ट्रेनों का संचालन
16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खुदाई पूरी (कुल 98 किमी, 95% कार्य)
46 में से 40 सुरंगों का ब्रेक-थ्रू, 130.6 किमी फाइनल लाइनिंग
19 में से 8 बड़े रेल पुल पूरे, जिनमें अलकनंदा नदी पर ब्रिज-8 और ब्रिज-9 शामिल
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