Last updated: September 22nd, 2026 at 03:14 pm

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पुलिस ने एक कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का खुलासा किया है। मारहरा क्षेत्र में वर्ष 2022 से चल रहे इस संस्थान पर छात्रों को मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने तथा फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप है। पुलिस ने मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज तथा शैक्षणिक रिकॉर्ड बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 16 सितंबर को एक कथित अपहरण की सूचना से हुई। पुलिस को बताया गया था कि बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी से जुड़े सतेन्द्र कुमार का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया है और दो लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के अनुसार अपहरण की सूचना झूठी निकली। इसी जांच के दौरान कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
जांच में पुलिस को पता चला कि महमूदपुर नगरिया क्षेत्र में एक परिसर से बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम पर विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही थी। इनमें डी.फार्मा, बी.फार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, बीएएमएस, जीएनएम और एएनएम जैसे पाठ्यक्रम शामिल बताए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि छात्रों और उनके अभिभावकों से प्रवेश, परीक्षा और शैक्षणिक दस्तावेजों के नाम पर धनराशि ली जाती थी।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान फर्जी मार्कशीट, छात्र पहचान पत्र, एडमिशन फॉर्म, फीस रसीदें, अटेंडेंस रिकॉर्ड, परीक्षा संबंधी सामग्री, फर्जी चेक, कॉलेज की मोहर और लेटर पैड समेत कई दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी जांच के लिए कब्जे में ली गई है। बरामद रिकॉर्ड में छात्रों के नाम, एनरोलमेंट नंबर, रोल नंबर और अटेंडेंस से संबंधित जानकारी मिलने की बात कही गई है।
पुलिस ने इस मामले में सतेन्द्र कुमार, गौरव अग्रवाल, भगवान दास, नरेन्द्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क से कितने छात्र जुड़े थे और उनसे कुल कितनी रकम ली गई।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ छात्रों और अन्य संभावित पीड़ितों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार कई छात्र पुलिस के संपर्क में पहुंचे हैं और उन्होंने कथित तौर पर फीस के रूप में बड़ी रकम दिए जाने की जानकारी दी है। एक अन्य शिकायत में मान्यता दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप भी सामने आया है। इन दावों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों पर हापुड़ स्थित एक विश्वविद्यालय का नाम पाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि ये दस्तावेज कहां तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। संबंधित संस्थानों और विभागों से जानकारी मांगे जाने की बात भी सामने आई है।
पुलिस आर्थिक लेनदेन और आरोपियों की संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य कथित फर्जी संस्थान के संचालन से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि इसमें कितने लोग शामिल थे। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच के साथ संभावित पीड़ित छात्रों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी संस्थान के जरिए कितने छात्रों को प्रभावित किया गया और कुल कितनी धनराशि का लेनदेन हुआ।
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