Last updated: August 10th, 2026 at 01:06 pm

कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है। मेरठ, गाजियाबाद और बागपत समेत कई जिलों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों पर इसका असर पड़ा है।
जिला प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान प्रमुख सड़कों और राजमार्गों पर बड़ी संख्या में कांवड़ियों की आवाजाही होती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था बनाए रखना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
गाजियाबाद और मेरठ में शैक्षणिक संस्थानों को 12 अगस्त तक बंद रखने की व्यवस्था की गई है। इसमें स्कूलों के अलावा कॉलेज और कई अन्य शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं। बागपत में भी कांवड़ यात्रा के मद्देनजर इसी तरह के प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
मुजफ्फरनगर में भी स्कूल और कॉलेजों को कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रखने का निर्णय लिया गया था। जिले में 3 अगस्त से 10 अगस्त तक संस्थानों को बंद रखने की व्यवस्था की गई, ताकि यात्रा के दौरान यातायात और सुरक्षा प्रबंधन को सुचारु रखा जा सके।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन क्षेत्रों से होकर कांवड़ियों की बड़ी संख्या गुजरती है। कई प्रमुख मार्गों पर पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही बढ़ने के कारण सामान्य यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में स्कूल बसों और विद्यार्थियों की आवाजाही को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए जरूरी हो जाता है।
गाजियाबाद में शैक्षणिक गतिविधियों को पूरी तरह रोकने से पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कुछ निजी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाया है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई को जारी रखने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन की ओर से केवल शिक्षण संस्थानों को बंद करने तक ही व्यवस्था सीमित नहीं है। कांवड़ मार्गों पर यातायात प्रबंधन, पुलिस तैनाती और सुरक्षा निगरानी भी बढ़ाई गई है।
कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जा रहा है। दिल्ली-Meerut Expressway पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुसार यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
10 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-Meerut Expressway के Meerut-UP Gate हिस्से पर नियमित वाहनों की आवाजाही को 11 अगस्त तक आवश्यकता के अनुसार रोका जा सकता है। Ghaziabad Police भीड़ के स्तर के आधार पर मार्ग को खोलने या बंद करने का निर्णय ले रही है।
इस व्यवस्था का सीधा असर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है। वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की आवश्यकता हो सकती है।
कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं और सामान्य यातायात दोनों को सुरक्षित रखना है। पैदल कांवड़ियों और वाहनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने से दुर्घटनाओं का खतरा कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्कूल और कॉलेज बंद करने का निर्णय भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। विद्यार्थियों को ऐसे समय में भारी यातायात और भीड़ वाले मार्गों से गुजरने से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
मेरठ, गाजियाबाद और बागपत जैसे जिलों में कांवड़ यात्रा के कारण सड़क यातायात पर विशेष दबाव रहता है। इसलिए जिला प्रशासन ने पुलिस, यातायात विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया है।
शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने-अपने जिले के प्रशासनिक आदेशों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। अलग-अलग जिलों में छुट्टी की अवधि और संस्थानों पर लागू नियम अलग हो सकते हैं।
कांवड़ यात्रा समाप्त होने और यातायात सामान्य होने के बाद शैक्षणिक संस्थानों को दोबारा खोलने का निर्णय संबंधित जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार होगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। स्कूल-कॉलेजों की अस्थायी छुट्टी, ऑनलाइन कक्षाएं और प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रण के जरिए प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के साथ सामान्य जनजीवन को भी व्यवस्थित रखने की कोशिश कर रहा है।
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