Last updated: October 3rd, 2026 at 02:39 pm

बिहार में गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। 3 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार राज्य में 28 स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति दर्ज की गई है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पानी उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है।
सबसे ज्यादा चिंता गंडक नदी को लेकर बनी हुई है। सारण जिले के कुछ इलाकों में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल गया। पनापुर और मकेर प्रखंडों में क्षतिग्रस्त तटबंधों से पानी बाहर निकलने के बाद करछौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा जैसे इलाकों तक पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंडक का जलस्तर कई महत्वपूर्ण स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। बिहार के आधिकारिक बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों के अनुसार 3 अक्टूबर को डुमरियाघाट, रेवाघाट, लालगंज और हाजीपुर समेत कई स्टेशनों पर गंडक का पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर था। लालगंज में नदी का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर दर्ज किया गया।
बाढ़ का असर केवल गंडक नदी के आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर भी अलग-अलग स्थानों पर बढ़ा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों में पटना, मुजफ्फरपुर, खगड़िया, सुपौल, कटिहार, भागलपुर, वैशाली, सीवान और पश्चिमी चंपारण सहित कई जिलों में नदियों का पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।
मुजफ्फरपुर में भी गंडक के बढ़ते पानी का असर सड़क संपर्क पर पड़ा है। बाढ़ का पानी मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद मुजफ्फरपुर-छपरा मार्ग के एक हिस्से में वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। अम्बारा चौक के पास बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया गया है। इससे इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान तेज किया है। प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नावों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश जारी है।
गंडक के बढ़े हुए जलस्तर का असर सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली और आसपास के क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। तटबंधों पर लगातार दबाव बना हुआ है और प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। जिन इलाकों में पानी का दबाव ज्यादा है, वहां स्थानीय अधिकारियों और इंजीनियरों को तटबंधों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नदियों के जलस्तर में बदलाव के बीच कुछ स्थानों पर पानी घटने के संकेत भी मिले हैं, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। डुमरियाघाट, लालगंज और रेवाघाट जैसे स्थानों पर जलस्तर में कमी दर्ज किए जाने के बावजूद कई जगह नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
नेपाल और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हुई बारिश का असर भी बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ा है। गंडक बेसिन में पानी बढ़ने के साथ तटबंधों पर दबाव बढ़ा है। प्रशासन की चुनौती अब प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ तटबंधों को सुरक्षित रखने और नए इलाकों में पानी फैलने से रोकने की है।
बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का ध्यान संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा, प्रभावित लोगों के बचाव, राहत सामग्री की आपूर्ति और सड़क संपर्क बनाए रखने पर है। नदी के जलस्तर में आने वाले बदलाव के आधार पर आगे की राहत और बचाव व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
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