Last updated: October 7th, 2026 at 03:11 pm

दिल्ली में लगातार हो रहे राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर धरना और प्रदर्शन को लेकर दिशा-निर्देश स्पष्ट किए हैं। पुलिस ने बताया है कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण और अनुमति प्राप्त प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थान है, लेकिन यहां प्रदर्शन करने के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी है। अनुमति के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होगा।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नई दिल्ली जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस यानी DCP से लेनी होगी। पुलिस ने यह व्यवस्था इसलिए दोहराई है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से राजधानी में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं।
बुधवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के नियमों को लेकर पुलिस ने अपनी स्थिति दोबारा स्पष्ट की।
दिल्ली पुलिस के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार जंतर-मंतर पर एक समय में अधिकतम 1,000 लोगों के प्रदर्शन की अनुमति है। अगर किसी संगठन या राजनीतिक दल को इससे बड़ी संख्या में लोगों के साथ प्रदर्शन करना है तो उसके लिए दूसरे निर्धारित स्थानों का इस्तेमाल करना होगा। 1,000 से 50,000 तक की भीड़ वाले कार्यक्रमों के लिए रामलीला मैदान और 50,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ के लिए बुराड़ी को निर्धारित प्रदर्शन स्थल बताया गया है।
पुलिस ने सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में प्रदर्शन को लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं। इंडिया गेट, सी-हेक्सागन, मान सिंह रोड, जनपथ, राजपथ और आसपास के लॉन जैसे इलाकों में प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। इन क्षेत्रों को राष्ट्रीय महत्व और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसलिए यहां भीड़ जुटाने या धरना देने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
पुलिस का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को खत्म करना नहीं है। बल्कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात और आम लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना इसका उद्देश्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण माना है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरे नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उचित नियमों की जरूरत बताई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर इस समय राजनीतिक बहस भी तेज है। कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि जंतर-मंतर पहले से ही विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान है, इसलिए पुलिस की अनुमति की शर्त को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए भी तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
इस बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। SIR के मुद्दे पर लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण सेंट्रल दिल्ली के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ी है। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग की जा रही है और जरूरत के अनुसार यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है। इससे प्रदर्शन वाले दिनों में आम लोगों को भी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में भी जंतर-मंतर पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। ऐसे में पुलिस की 10 दिन पहले अनुमति लेने वाली व्यवस्था और 1,000 लोगों की सीमा पर निगाह बनी रहेगी। SIR को लेकर राजनीतिक विवाद जारी रहने के कारण दिल्ली में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।
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