Last updated: July 26th, 2026 at 01:09 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई के मामले में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ को लोकतांत्रिक विरोध और असहमति से जुड़े मुद्दों पर ‘जंतर-मंतर से सबक लेने’ की सलाह दी।
महबूबा मुफ्ती की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी संपत्तियों और उसके भवनों को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है। विश्वविद्यालय का संबंध समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से रहा है और इस कारण यह मामला लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील विषय बना हुआ है।
महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकारों को राजनीतिक विरोध और असहमति को लोकतांत्रिक तरीके से स्वीकार करना चाहिए। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
जौहर विश्वविद्यालय रामपुर में स्थित है और पिछले कुछ वर्षों में यह कई राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है। विश्वविद्यालय और इससे जुड़ी संपत्तियों को लेकर अलग-अलग स्तर पर कानूनी प्रक्रियाएं चलती रही हैं। आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि उत्तर प्रदेश में सरकार की कार्रवाई कई बार राजनीतिक प्रतिशोध की तरह दिखाई देती है। दूसरी ओर, राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल का पक्ष रहा है कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी संस्था या व्यक्ति ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। जौहर विश्वविद्यालय का मामला भी इसी राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच बना हुआ है।
महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि आजम खान को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया है। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कानून के मुताबिक कार्रवाई की बात कही जाती रही है।
इस पूरे विवाद के बीच जंतर-मंतर का संदर्भ भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। महबूबा मुफ्ती ने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को लोकतांत्रिक विरोध और असहमति के महत्व की याद दिलाने की कोशिश की।
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े 38 भवनों को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई पर अब राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। यदि कार्रवाई आगे बढ़ती है तो यह मामला एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासकर आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान में इस्तेमाल कर सकता है।
महबूबा मुफ्ती के बयान के बाद जौहर विश्वविद्यालय को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस विवाद का अगला चरण कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा। वहीं, राजनीतिक रूप से यह मामला उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ BJP और विपक्ष के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी।
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