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दिल्ली की हवा लगातार हो रही खराब, अक्टूबर की शुरुआत 2020 के बाद सबसे प्रदूषित

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब होती जा रही
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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। शहर में पिछले कई दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रविवार को दिल्ली का औसत AQI 187 तक पहुंच गया, जो पिछले 82 दिनों में सबसे खराब स्तर रहा। इसके साथ ही अक्टूबर की शुरुआत पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक प्रदूषित शुरुआत के रूप में दर्ज की गई।

     

    सोमवार सुबह भी प्रदूषण से राहत नहीं मिली। सुबह 9 बजे दिल्ली का AQI करीब 178 दर्ज किया गया और हवा अभी भी मध्यम श्रेणी में रही। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार सुबह न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस रहा। रविवार को अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

     

    रविवार को दिल्ली के 43 सक्रिय मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 14 स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई थी। मुंडका में AQI 273 तक पहुंच गया, जबकि मथुरा रोड सीआरआरआई और नरेला में यह 257 रहा। जहांगीरपुरी में भी AQI 237 दर्ज किया गया। इसके विपरीत दिल्ली कैंट क्षेत्र में AQI 97 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है।

     

    प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम में आए बदलाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सितंबर के आखिर में हुई बारिश ने कुछ समय के लिए हवा में मौजूद प्रदूषकों को कम करने में मदद की थी। बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदूषक वातावरण से बाहर निकल रहे थे। लेकिन बारिश रुकने और हवाओं की गति कम होने के बाद सड़क की धूल और दूसरे स्थानीय प्रदूषक फिर से वातावरण में जमा होने लगे हैं।

     

    इस समय PM10 दिल्ली की हवा को प्रभावित करने वाला प्रमुख प्रदूषक बना हुआ है। सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषक इसके स्तर को बढ़ा सकते हैं। आने वाले दिनों में पराली जलाने और सर्दियों के दौरान प्रदूषकों के फैलाव में कमी आने से दिल्ली की हवा पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

     

    वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को दिल्ली की इनर और आउटर रिंग रोड के करीब 35 किलोमीटर हिस्से में निरीक्षण किया गया। इस दौरान सड़क की धूल और निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे से जुड़े 17 उल्लंघन सामने आए। संबंधित एजेंसियों को इन कमियों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण को केवल सर्दियों के दौरान नियंत्रित करने के बजाय पूरे साल उत्सर्जन कम करने की जरूरत है। परिवहन, उद्योग, बिजली संयंत्र, निर्माण गतिविधियां, कचरा प्रबंधन और कृषि अवशेष जैसे कई स्रोत दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

     

    दिल्ली के लिए चिंता की बात यह भी है कि अक्टूबर की शुरुआत में प्रदूषण का स्तर पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक रहा है। इस साल अक्टूबर के शुरुआती चार दिनों का औसत AQI 174.5 रहा, जबकि 2025 में यह 119.75 था। इससे साफ है कि राजधानी में प्रदूषण का स्तर इस साल अपेक्षाकृत जल्दी बढ़ना शुरू हो गया है।

     

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है और मंगलवार से आसमान में आंशिक बादल रहने की संभावना है। बारिश होने की स्थिति में प्रदूषण से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय तक हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर लगातार नियंत्रण जरूरी होगा।

     

    दिल्ली में बढ़ता AQI एक बार फिर राजधानी के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। अक्टूबर और नवंबर के साथ प्रदूषण की स्थिति और खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, कचरे का उचित निपटान और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम आने वाले दिनों में बेहद जरूरी होंगे।

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