Last updated: August 30th, 2026 at 02:41 pm
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2021 के हिट-एंड-रन मामले में पूर्व दिल्ली परिवहन निगम (DTC) बस चालक करण सिंह को लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के मामले में दोषी ठहराया है। इस हादसे में एक मोटरसाइकिल सवार की मौत हुई थी। अदालत ने अपने आदेश में चालक के व्यवहार को स्पष्ट रूप से लापरवाहीपूर्ण बताया।
मामला इंद्रपुरी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, करण सिंह DPS मार्ग पर NASC कॉम्प्लेक्स के पास CNG से चलने वाली DTC बस चला रहे थे। इसी दौरान बस ने आगे चल रहे दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मार दी। मोटरसाइकिल पर अमित सिंह अपने भाई के साथ सवार थे। टक्कर के बाद अमित सिंह सड़क पर गिर गए और बस के पिछले पहिए की चपेट में आ गए।
हादसा इतना गंभीर था कि पीड़ित को सिर में गंभीर चोट आई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अदालत के समक्ष पेश किए गए रिकॉर्ड में मेडिकल और तकनीकी साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया। जांच के दौरान बस के निरीक्षण में उसके पिछले टायर पर सूखे खून और अन्य जैविक अवशेष पाए जाने की बात सामने आई, जिसे अभियोजन ने हादसे से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया।
करण सिंह ने अदालत में यह बचाव लिया कि हादसे में शामिल वाहन उनकी बस नहीं थी। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ट्विंकल चावला ने पीड़ित के भाई की गवाही के साथ-साथ तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों पर भरोसा किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी बस चालक की भूमिका स्थापित करने के लिए पर्याप्त थे।
अदालत ने यह भी गौर किया कि दुर्घटना सुबह के व्यस्त समय में हुई थी और बस अपने निर्धारित लेन में नहीं चल रही थी। एक बड़े सार्वजनिक वाहन को चलाने वाले पेशेवर चालक से सड़क पर मौजूद अन्य लोगों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपेक्षा होती है। अदालत के अनुसार, चालक समय रहते बस की गति कम कर सकता था और ब्रेक लगा सकता था।
मामले में बस की ब्रेक प्रणाली की भी जांच की गई थी। निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन में ब्रेक संबंधी कोई यांत्रिक खराबी नहीं मिली। अदालत ने इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए चालक के इस व्यवहार को गंभीर माना कि उसने समय रहते वाहन को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और 304A के तहत दर्ज किया गया था। धारा 279 सार्वजनिक रास्ते पर लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित थी, जबकि धारा 304A लापरवाही के कारण मौत होने से जुड़ी थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी जिस प्रकार का वाहन चला रहा था, उसे देखते हुए उससे सामान्य वाहन चालक की तुलना में अधिक सावधानी की अपेक्षा थी। DTC बस जैसे भारी और बड़े सार्वजनिक वाहन के चालक की छोटी सी लापरवाही भी सड़क पर गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
इस मामले में अदालत का फैसला दिल्ली में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की जिम्मेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी की सड़कों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में DTC बसें, निजी वाहन, दोपहिया और पैदल यात्री चलते हैं। ऐसे में भारी वाहनों के चालकों से सुरक्षित ड्राइविंग की अपेक्षा की जाती है।
सड़क दुर्घटनाओं में जांच के दौरान केवल प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही ही नहीं, बल्कि CCTV फुटेज, वाहन की तकनीकी जांच, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस मामले में अदालत ने भी प्रत्यक्ष गवाही के साथ तकनीकी साक्ष्यों को महत्व दिया।
अदालत ने करण सिंह को दोषी ठहराया है। उपलब्ध रिपोर्टों में दोषसिद्धि का विवरण है; सजा की मात्रा पर अदालत का अलग आदेश अभी सामने आना बाकी है। इसलिए इस स्तर पर उनकी अंतिम सजा को लेकर कोई अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
यह फैसला उन मामलों में भी महत्वपूर्ण है जहां आरोपी वाहन चालक दुर्घटना में अपनी भूमिका से इनकार करता है। अदालत ने इस मामले में उपलब्ध तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों को एक साथ देखते हुए निष्कर्ष निकाला कि आरोपी की बस ही हादसे में शामिल थी।
2021 की घटना के करीब पांच साल बाद आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के बाद भी संबंधित पक्षों को कानून के तहत उपलब्ध अपील के अधिकार का इस्तेमाल करने का विकल्प रहता है।
दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते यातायात और भारी वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। खासकर सार्वजनिक परिवहन के चालकों पर यात्रियों के साथ-साथ अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
दिल्ली की अदालत ने 2021 के हिट-एंड-रन मामले में पूर्व DTC बस चालक करण सिंह को लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई मौत के मामले में दोषी ठहराया है। अभियोजन के अनुसार, उनकी बस ने इंद्रपुरी में DPS मार्ग पर एक मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मारी थी, जिसमें अमित सिंह की मौत हुई। अदालत ने प्रत्यक्ष गवाही, तकनीकी साक्ष्यों और बस की जांच रिपोर्ट के आधार पर बचाव पक्ष की दलील को खारिज किया।
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