Last updated: July 6th, 2026 at 12:14 pm

दिल्ली की राजनीति में आज उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर दान गड़बड़ी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाए। इसके जवाब में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी “अहंकार की राजनीति” अभी भी जारी है और वे तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोप लगाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि राम मंदिर दान गड़बड़ी मामले की जांच पहले से चल रही है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं और किसी भी स्तर पर दोषियों को बचाने का प्रयास नहीं किया जाएगा। भाजपा ने विपक्ष पर धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप भी लगाया।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों में जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर दान विवाद अब केवल प्रशासनिक या कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसका राजनीतिक प्रभाव भी दिखाई देने लगा है। विपक्ष इस मुद्दे को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर उठा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि जांच की प्रक्रिया को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक और सार्वजनिक महत्व के संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत रहता है और किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना आसान होता है। उनका मानना है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए।
दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिलता रहा है। अब राम मंदिर दान विवाद भी दोनों दलों के बीच एक नया राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और बयानबाज़ी तथा राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से लिए जाने वाले प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
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