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दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, करीब 150 लोग हिरासत में; SIR को लेकर उठे सवाल

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, करीब 150 लोग हिरासत में; SIR को लेकर उठे सवा   नई दिल्ली
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दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, करीब 150 लोग हिरासत में; SIR को लेकर उठे सवा

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    नई दिल्ली में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास हुए प्रदर्शनों में राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रोकने सहित कई मांगें उठाईं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और कई लोगों को हिरासत में लिया।

     

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को जंतर-मंतर और दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के आसपास तीन अलग-अलग स्थानों से करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें राजनीतिक नेता, छात्र नेता और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल थे। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। हिरासत में लिए गए लोगों को अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

     

    जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की दिल्ली इकाई और अन्य संगठनों की ओर से किया गया था। प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा, पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई लोग पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया।

     

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया पर रोक शामिल थी। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हों, उन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

     

    पुलिस की ओर से बताया गया कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत नई दिल्ली जिले में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लागू था। इसी वजह से पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई और बैरिकेड लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया। पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति के भीड़ को आगे बढ़ने से रोकना जरूरी था।

     

    इसी दिन दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। कांग्रेस कार्यकर्ता राजीव भवन और दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के आसपास एकत्र हुए और वहां से निर्वाचन सदन की ओर बढ़े। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च रोका और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन ले जाया गया और रिहा कर दिया गया।

     

    प्रदर्शन के मद्देनजर चुनाव आयोग के कार्यालय और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया और इलाके में बैरिकेड लगाए। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना और यातायात तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

     

    SIR को लेकर राजनीतिक विवाद केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने शुक्रवार को दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रदर्शन किए। पार्टी की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए गए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

     

    वहीं, चुनाव आयोग और SIR को लेकर उठाए गए आरोपों पर राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में विवाद का अगला चरण राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए आगे बढ़ने की संभावना है।

     

    दिल्ली में शुक्रवार का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस तेज है। प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस की कार्रवाई ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।  पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया है, जबकि प्रदर्शन से जुड़ी राजनीतिक और कानूनी मांगों पर संबंधित प्रक्रियाएं आगे जारी हैं।

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