Last updated: November 3rd, 2026 at 01:02 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 तक राजधानी में डेंगू के 1,083 और मलेरिया के 355 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा चिकनगुनिया के मामले भी सामने आए हैं। बदलते मौसम और कई इलाकों में जमा पानी के कारण मच्छरों के प्रजनन की आशंका बढ़ रही है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने निगरानी तथा रोकथाम अभियान तेज कर दिया है।
दिल्ली में हर साल मानसून और उसके बाद के महीनों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के दौरान घरों, पार्कों, निर्माण स्थलों और खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने का अनुकूल वातावरण मिलता है। यही कारण है कि सितंबर से नवंबर के बीच इन बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखने को मिलती है।
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अक्टूबर के अंत तक डेंगू के 1,083 मामले सामने आए हैं। वहीं मलेरिया के 355 मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में इन बीमारियों से अब तक किसी मौत की पुष्टि नहीं होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि संक्रमण को रोकने के लिए लगातार सतर्कता और निगरानी जरूरी है।
डेंगू मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर सामान्यतः साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। घरों में रखे कूलर, पानी की टंकियां, गमले, पुराने टायर, खाली डिब्बे और छतों पर जमा पानी इसके प्रजनन के प्रमुख स्थान हो सकते हैं। वहीं मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। दोनों बीमारियों के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मरीजों में तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, त्वचा पर चकत्ते और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में प्लेटलेट्स कम होने और रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि मरीज को पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी अथवा बेचैनी महसूस हो, तो तत्काल अस्पताल में इलाज कराना चाहिए।
मलेरिया के मामलों में ठंड लगने के साथ तेज बुखार, पसीना आना, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने पर कुछ प्रकार का मलेरिया गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
दिल्ली नगर निगम की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करने के लिए निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा घरों, बाजारों, स्कूलों और निर्माण स्थलों पर जांच की जा रही है। जहां पानी जमा मिलता है, वहां संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवाओं के छिड़काव के माध्यम से मच्छरों की संख्या नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखें और कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें। गमलों की प्लेट, पुराने टायर और अनुपयोगी बर्तनों में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी संक्रमण से बचाव में मददगार हो सकता है।
दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन का प्रयास है कि समय रहते मच्छरों के प्रजनन को रोका जाए और संक्रमित मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सरकारी कार्रवाई से इन बीमारियों पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
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