Last updated: October 25th, 2026 at 04:16 am

दिल्ली सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों की पात्रता की जांच के लिए व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया के तहत राजधानी में पेंशन प्राप्त कर रहे करीब 4.36 से 4.4 लाख वरिष्ठ नागरिकों के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से लगभग 20 से 25 प्रतिशत के नाम हटाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह अभी शुरुआती अनुमान है और अंतिम संख्या सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ऐसे लाभार्थियों की पहचान करना है जो अब योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इनमें मृत व्यक्तियों के नाम पर जारी पेंशन, एक ही व्यक्ति के दोहरे रिकॉर्ड और ऐसे मामले शामिल हो सकते हैं जिनमें लाभार्थी को नियमों के अनुसार पेंशन नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन अभियान लगभग तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस काम के लिए सरकार ने एक तीसरी एजेंसी की मदद ली है। सर्वेक्षण के दौरान टीमों को लाभार्थियों के घर जाकर उनकी पहचान और रिकॉर्ड का सत्यापन करना होगा। इसके लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही लाभार्थियों की लाइव तस्वीर ली जाएगी और संबंधित दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपडेट किया जाएगा।
दिल्ली सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को नियमित आर्थिक सहायता देने के लिए चलाई जाती है। मौजूदा व्यवस्था के तहत 60 से 69 वर्ष की आयु वाले पात्र लाभार्थियों को हर महीने 2,000 रुपये मिलते हैं, जबकि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। यह राशि बुजुर्गों को भोजन, दवाइयों और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के खर्च में मदद करती है।
योजना के लाभार्थियों की संख्या कई लाख होने के कारण रिकॉर्ड का सही होना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है और उसका नाम सरकारी रिकॉर्ड से नहीं हटाया जाता, तो पेंशन भुगतान में अनियमितता हो सकती है। इसी तरह, एक ही व्यक्ति के नाम पर दो रिकॉर्ड होने या अन्य सरकारी सहायता के साथ नियमों के विरुद्ध लाभ मिलने की स्थिति में भी जांच की आवश्यकता होती है।
हालांकि, इस सत्यापन अभियान को लेकर वरिष्ठ नागरिकों के बीच चिंता भी पैदा हो सकती है। कई बुजुर्ग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पेंशन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जांच के दौरान वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। विशेष रूप से उन लोगों के लिए व्यवस्था आसान होनी चाहिए जो बीमारी, शारीरिक कमजोरी या उम्र संबंधी समस्याओं के कारण सत्यापन केंद्र तक नहीं पहुंच सकते।
घर-घर जाकर सत्यापन करने की व्यवस्था से ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। फिर भी लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपना आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, पेंशन से संबंधित दस्तावेज और वर्तमान पते का विवरण तैयार रखें। यदि किसी व्यक्ति को रिकॉर्ड में गलती दिखाई देती है, तो उसे संबंधित सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों से संपर्क करके सुधार कराने की कोशिश करनी चाहिए।
दिल्ली सरकार ने इससे पहले भी पेंशन योजना के रिकॉर्ड में कमियां सामने आने की बात कही थी। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 13,000 लाभार्थियों के पते अधूरे थे और 48 लाभार्थियों के रिकॉर्ड में पता दर्ज नहीं था। हालांकि, किसी पते का अधूरा या दोहराया जाना अपने आप में धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं होता। इसलिए प्रत्येक मामले की उचित जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और सही लाभार्थियों की पहचान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ पात्र लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि सत्यापन में किसी लाभार्थी को अपात्र पाया जाता है, तो निर्णय संबंधित नियमों और प्रमाणों के आधार पर लिया जाना चाहिए। लाभार्थियों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने और रिकॉर्ड में सुधार कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
दिल्ली में वृद्धावस्था पेंशन योजना के सभी मौजूदा लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। तीन महीने में इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वेक्षण के बाद ही पता चलेगा कि कितने नाम हटाए जाएंगे और कितने लाभार्थियों को योजना के तहत सहायता मिलती रहेगी।
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