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दिल्ली में CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं से मारपीट, वायरल वीडियो के बाद चार आरोपी गिरफ्तार

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों और
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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों और महिलाओं के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान डीडीयू मार्ग पर कुछ लोगों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ हाथापाई किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस घटना ने राजधानी में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा, पुलिस की भूमिका और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

     

    पुलिस के मुताबिक, यह घटना कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई थी। यह संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा था। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े आरोपों पर जवाब दिया जाए। विपक्षी समूहों और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने कामकाज में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

     

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। वीडियो में कुछ लोगों को प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के दौरान महिलाओं को भी निशाना बनाया गया। वीडियो में मौके पर एक पुलिसकर्मी भी दिखाई देने की बात कही गई है। इस दृश्य को लेकर कई राजनीतिक संगठनों और छात्र समूहों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए और पूछा कि जब प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट हो रही थी, तब उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

     

    दिल्ली पुलिस ने मामले में चार आरोपियों की पहचान रमन सैनी, विवेकानंद उर्फ विवेक, कपिल कुमार और रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू के रूप में की है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने खुद को हिंदू रक्षा दल से जुड़ा बताया था। हालांकि, किसी संगठन से संबंध होने का दावा अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। चारों को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

     

    पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में शुरुआत में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद वायरल वीडियो और अन्य सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने खुद संज्ञान लिया। जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों ने वीडियो में दिख रहे स्थान की पहचान डीडीयू मार्ग के रूप में की, जो कमला मार्केट थाना क्षेत्र में आता है। पुलिस को सूचना मिली थी कि कथित आरोपी दिल्ली-एनसीआर छोड़कर जा सकते हैं। इसके बाद उनकी तलाश कर उन्हें हिरासत में लिया गया और गिरफ्तार किया गया।

     

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी है। 10 और 11 अक्टूबर को राजधानी के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान 700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों के सदस्य शामिल थे। कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों और वैन में ले जाया गया। इस कार्रवाई को लेकर भी विरोधी दलों और छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं।

     

    छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई। सोमवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्यों ने अपनी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। ये आरोप स्वतंत्र जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के विषय हैं। पुलिस की ओर से किसी भी कथित दुर्व्यवहार की पुष्टि या खंडन को तथ्यों के आधार पर देखा जाना जरूरी है।

     

    विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले की आलोचना की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और किसी भी प्रदर्शनकारी के साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। किसी भी पक्ष की कार्रवाई की वैधता का आकलन संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

     

    चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है। पुलिस के सामने घटना के पूरे क्रम, कथित हमले में शामिल लोगों की भूमिका और मौके पर मौजूद अन्य व्यक्तियों की गतिविधियों की पड़ताल करना महत्वपूर्ण होगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राजनीतिक विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए और किसी भी तरह की हिंसा के आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई कैसे हो।

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