Last updated: October 13th, 2026 at 03:20 pm

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन 13 अक्टूबर 2026 को भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में मार्च निकाला और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध तेज किया है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेजों के जरिए नाम दोबारा जुड़वाने का उचित अवसर मिलना चाहिए। विपक्ष ने यह भी मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित फैसलों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
सोमवार को निकाला गया मार्च दिल्ली के बाराखंभा रोड और सेंट्रल दिल्ली के अन्य हिस्सों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा। मार्च में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण मध्य दिल्ली की कुछ सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा गया।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े आरोपों की जांच की मांग उठाई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग शामिल है। हालांकि, याचिका दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने विपक्ष के आरोपों को सही मान लिया है। मामले में आगे का फैसला न्यायिक सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।
13 अक्टूबर को इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन पीठ के एक न्यायाधीश की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई 15 अक्टूबर तक टाल दी गई। अदालत में प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। इस मामले में दिल्ली पुलिस से वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी और जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली में यह मार्च ऐसे समय हुआ है, जब पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद जारी है। इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और कुछ इलाकों में सुरक्षा प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है और जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हों, वे निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों की आलोचना की है।
पूरे विवाद का केंद्र मतदाता सूची की विश्वसनीयता, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही है। विपक्ष चाहता है कि इन सवालों की न्यायिक निगरानी में जांच हो, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। अब सभी की निगाहें 15 अक्टूबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में आगे होने वाली कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि विपक्ष की मांगों पर किस दिशा में विचार किया जाएगा और SIR प्रक्रिया को लेकर अगला कानूनी कदम क्या होगा।
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