Last updated: October 9th, 2026 at 03:23 pm

उत्तर प्रदेश में दिवाली से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के 455 लेखपालों को पदोन्नति का तोहफा दिया है। इन कर्मचारियों को राजस्व निरीक्षक यानी कानूनगो के पद पर प्रमोट किया गया है। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने चयन वर्ष 2025-26 के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब पदोन्नत कर्मचारियों की नई तैनाती के आदेश जल्द जारी किए जाने की उम्मीद है। इस फैसले से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को राहत मिली है।
राजस्व विभाग के मुताबिक, पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी के माध्यम से संपन्न कराई गई। कर्मचारियों की पात्रता और उनके सेवा अभिलेखों की जांच करने के बाद 455 लेखपालों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया। निर्धारित नियमों और मानकों के आधार पर पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद उन्हें राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नत करने का निर्णय लिया गया।
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड के चेयरमैन बीएल मीणा के अनुसार, ऑनलाइन डीपीसी के जरिए पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभागीय कामकाज को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब संबंधित कर्मचारियों की तैनाती के आदेश जारी किए जाने बाकी हैं। नई तैनाती के बाद कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में राजस्व निरीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
राजस्व निरीक्षक का पद राजस्व प्रशासन में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर कार्यरत अधिकारियों की जिम्मेदारी तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व संबंधी कामकाज की निगरानी तथा पर्यवेक्षण से जुड़ी होती है। जमीन की पैमाइश, राजस्व अभिलेखों के रखरखाव, भूमि से जुड़े मामलों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका अहम रहती है। ऐसे में पदोन्नति के माध्यम से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से विभागीय व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में जमीन से जुड़े मामलों का समय पर निस्तारण प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहा है। भूमि की सीमाओं को लेकर विवाद, पैमाइश, राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में लोगों को अक्सर तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत पड़ती है। इन कार्यों में लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की भूमिका एक-दूसरे से जुड़ी होती है। लेखपाल क्षेत्रीय स्तर पर जमीन और राजस्व से संबंधित जानकारी जुटाते हैं, जबकि राजस्व निरीक्षक निगरानी और पर्यवेक्षण सहित निर्धारित विभागीय जिम्मेदारियां निभाते हैं।
455 लेखपालों की पदोन्नति से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने में मदद मिलने की संभावना है। इससे विभाग को उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करने और क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी मजबूत करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर कर्मचारियों की तैनाती, कार्यक्षेत्र के निर्धारण और विभागीय कामकाज में उनके योगदान पर निर्भर करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार राजस्व मामलों के त्वरित और न्यायसंगत निस्तारण के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देती रही है। ऑनलाइन डीपीसी के माध्यम से पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करना इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था से पात्रता और सेवा अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने तथा विभागीय निर्णय समय पर लेने में सहायता मिल सकती है।
दिवाली से पहले पदोन्नति मिलने से चयनित कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। अब उनकी नजरें नई तैनाती के आदेशों पर रहेंगी। आदेश जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पदोन्नत कर्मचारियों को किन स्थानों पर जिम्मेदारी सौंपी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से राजस्व प्रशासन की निगरानी बेहतर होगी और भूमि से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
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