Last updated: January 31st, 2026 at 08:29 am
बिजली बिल और मीटर विवादों में उपभोक्ता फोरम ने 9 में से 8 मामलों में मानी निगम की चूक
नैनीताल जिले में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतें अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में पहुंचे मामलों की सुनवाई के बाद सामने आया है कि अधिकांश विवादों में गलती बिजली विभाग की ही पाई गई। मीटर रीडिंग से लेकर बिलिंग तक की खामियों पर फोरम ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को राहत दिलाई है। फोरम के आंकड़ों के मुताबिक, बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज शिकायतों में से करीब 90 प्रतिशत मामलों में ऊर्जा निगम की लापरवाही या तकनीकी त्रुटि सामने आई। इन मामलों में उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसले सुनाए गए और गलत बिलों में संशोधन के आदेश दिए गए।
बिल और मीटर बने सबसे बड़ी परेशानी
रिकॉर्ड बताते हैं कि उपभोक्ताओं की सबसे ज्यादा शिकायतें असामान्य रूप से अधिक बिजली बिल, गलत मीटर रीडिंग और स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन में लापरवाही से जुड़ी रहीं। कुल निस्तारित मामलों में बड़ी संख्या बिल और मीटर से संबंधित थी, जिनमें अधिकांश में विभाग की गलती प्रमाणित हुई।
तेजी से निस्तारण, फिर भी सवाल
फोरम ने अधिकांश मामलों का निपटारा 60 दिनों से कम समय में किया, लेकिन यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिल पा रहा। मजबूरन उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
कुछ मामलों ने खोली पोल
रानीबाग निवासी एक उपभोक्ता को कम खपत के बावजूद हजारों रुपये का बिल थमा दिया गया। जांच के बाद कोर्ट ने वास्तविक खपत के आधार पर बिल संशोधन और अतिरिक्त शुल्क माफ करने के निर्देश दिए। एक अन्य मामले में सोलर प्लांट से जुड़ी शिकायत सामने आई, जहां गलत स्मार्ट मीटर लगाने के कारण महीनों तक उत्पादन शून्य दिखता रहा। जांच में निजी एजेंसी की लापरवाही उजागर हुई और उपभोक्ता को हुए नुकसान की भरपाई के आदेश दिए गए।
उपभोक्ताओं के लिए संकेत
ये फैसले साफ संकेत देते हैं कि अगर उपभोक्ता सही दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उन्हें न्याय मिल सकता है। साथ ही यह भी कि बिजली विभाग को अब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा, वरना शिकायतों की संख्या और सख्ती दोनों बढ़ सकती हैं।
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