Last updated: October 6th, 2026 at 02:34 pm

बिहार में फरक्का जल संधि को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का जनसंवाद अभियान लगातार तेज हो रहा है। पार्टी के ‘नीतीश संवाद’ के दूसरे चरण की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो गई है। यह अभियान 9 अक्टूबर तक चलेगा और इस दौरान सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। JDU का कहना है कि इस अभियान के जरिए लोगों को फरक्का जल संधि के बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों और राज्य के जल हितों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
JDU के कार्यक्रम के अनुसार, 6 अक्टूबर को सारण में, 7 अक्टूबर को वैशाली में, 8 अक्टूबर को समस्तीपुर में और 9 अक्टूबर को पटना में ‘नीतीश संवाद’ आयोजित किया जाएगा। पार्टी इससे पहले गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में इस मुद्दे को लेकर अभियान शुरू कर चुकी है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर लोगों से बातचीत करने और फरक्का समझौते से जुड़े मुद्दों को सामने रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ा समझौता है। 12 दिसंबर 1996 को हुए इस समझौते की अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई थी और यह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। इसी वजह से इसके भविष्य को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। JDU चाहती है कि किसी भी नए समझौते या पुराने समझौते के नवीनीकरण में बिहार की जल जरूरतों और राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
JDU का मुख्य तर्क है कि फरक्का बैराज और जल बंटवारे की मौजूदा व्यवस्था का बिहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने की समस्या बढ़ी है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। पार्टी का यह भी कहना है कि शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर राज्य के सामने अलग तरह की चुनौतियां पैदा होती हैं।
JDU के नेताओं ने इस मुद्दे को केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं रखा है। उनका कहना है कि बिहार की बढ़ती आबादी और बदलती जल जरूरतों को देखते हुए आने वाले वर्षों के लिए राज्य के हितों को ध्यान में रखकर नीति बनाना जरूरी है। पार्टी का मानना है कि बिहार को बाढ़ और जल संकट दोनों समस्याओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।
इस अभियान को JDU की संगठनात्मक गतिविधि के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं ने संबंधित जिलों के विधायकों, विधान पार्षदों, जिलाध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की है। इससे साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को जमीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है।
फरक्का जल संधि को लेकर केंद्र स्तर पर भी बिहार के हितों की चर्चा हो चुकी है। JDU नेता संजय झा ने पहले इस विषय को उठाते हुए बिहार की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से भी बिहार के हितों का ध्यान रखे जाने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में JDU अब इस मुद्दे को जनता के बीच लगातार उठाकर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आने वाले दिनों में फरक्का जल संधि बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती है। दिसंबर में मौजूदा समझौते की अवधि समाप्त होने वाली है, इसलिए उससे पहले JDU का यह अभियान राज्य के जल अधिकारों, बाढ़ और भविष्य की पानी की जरूरतों पर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। 6 से 9 अक्टूबर तक होने वाले दूसरे चरण के कार्यक्रमों के बाद पार्टी आगे भी इस विषय पर जनसंवाद जारी रखने की तैयारी में है।
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