Last updated: September 29th, 2026 at 10:06 am

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच गंडक और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से मुजफ्फरपुर जिले के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। नदियों का पानी बढ़ने से साहेबगंज, पारू और कटरा प्रखंड के कई स्कूलों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है और कुछ स्थानों पर स्कूलों में सामान्य गतिविधियां बाधित हुई हैं।
मुजफ्फरपुर जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर का असर साहेबगंज और पारू प्रखंड के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई स्कूल परिसरों में पानी पहुंचने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है। वहीं बागमती नदी के बढ़े जलस्तर से कटरा प्रखंड के आठ स्कूलों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कुल मिलाकर दो दर्जन से अधिक स्कूल बाढ़ के पानी से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति के पीछे नेपाल के तराई क्षेत्र और गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश का भी असर बताया जा रहा है। वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए पानी के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है। पानी बढ़ने के साथ ही नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य के आधिकारिक बाढ़ निगरानी आंकड़ों में भी कई नदियों के जलस्तर को चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है। मुजफ्फरपुर में गंडक नदी के रेवाघाट और बागमती नदी के रनिसैदपुर स्टेशन पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। बूढ़ी गंडक का जलस्तर भी कांति स्टेशन पर चेतावनी स्तर से ऊपर रहा।
स्कूलों के प्रभावित होने का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में स्कूल परिसर या वहां तक पहुंचने वाले रास्तों पर पानी जमा है, वहां बच्चों की नियमित आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ प्रभावित इलाकों में बच्चों के आवागमन के लिए नाव का सहारा भी लिया जा रहा है। बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की सुरक्षा बनी हुई है। जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से होकर बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा रहा है।
बाढ़ का असर केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण सड़कों पर पानी जमा होने और संपर्क मार्ग प्रभावित होने से लोगों की आवाजाही भी बाधित हुई है। बाजार, स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी कुछ क्षेत्रों के लोगों को कठिनाई हो रही है। प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी तक राहत और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।
इस बीच बिहार के दूसरे हिस्सों में भी कई नदियां ऊंचे जलस्तर पर बह रही हैं। आधिकारिक निगरानी आंकड़ों के अनुसार गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कोसी और गंगा के कई निगरानी केंद्रों पर जलस्तर चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है। पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर दर्ज हुआ।
गंडक नदी के दबाव के कारण पश्चिम चंपारण के कुछ इलाकों में तटबंधों को भी नुकसान पहुंचा है। पानी का दबाव बढ़ने से कई स्थानों पर रिसाव और तटबंध के कमजोर होने की स्थिति सामने आई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और मरम्मत का काम कर रही हैं।
मुजफ्फरपुर में स्कूलों के प्रभावित होने के बीच स्थानीय प्रशासन के सामने विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने की चुनौती है। जलस्तर में कमी आने के बाद स्कूलों और रास्तों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जब तक प्रभावित क्षेत्रों में पानी पूरी तरह नहीं निकलता, तब तक बच्चों की आवाजाही और स्कूल परिसरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी रहेगा।
गंडक और बागमती के जलस्तर पर निगरानी जारी है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को नदी और बाढ़ के पानी से दूर रहने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। मौसम में सुधार के बावजूद पहले से जमा पानी और ऊंचे नदी जलस्तर के कारण निचले इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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