Last updated: July 26th, 2026 at 01:03 pm

बिहार की राजनीति में NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में बनी हुई हैं। NEET पेपर लीक के विरोध में आयोजित प्रदर्शन और बिहार बंद से जुड़े एक मामले में तेज प्रताप यादव को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
तेज प्रताप यादव की हिरासत के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।
NEET परीक्षा को लेकर देशभर में छात्रों के बीच पहले से ही असंतोष देखने को मिला है। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रश्नपत्र की सुरक्षा और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा की है। बिहार में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों का सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ता है और इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
तेज प्रताप यादव की ओर से भी NEET पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई गई है। उनके समर्थकों का कहना है कि छात्रों के हित में आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं, प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। इस घटनाक्रम के बाद बिहार में एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
बिहार की राजनीति में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। राज्य के बड़ी संख्या में छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में किसी भी परीक्षा में पेपर लीक या अनियमितता की खबर सामने आने पर इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है। विपक्षी दल लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
तेज प्रताप यादव को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कुछ नेताओं ने इसे सरकार की ओर से विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है।
इस बीच, छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच भी NEET परीक्षा को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता हो और यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता उनके वर्षों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
तेज प्रताप यादव की न्यायिक हिरासत और NEET पेपर लीक के मुद्दे ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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