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बिहार में बाढ़ का कहर, 15 जिलों में 47 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; घटते पानी ने बढ़ाई नई चिंता

बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में करीब 47.92 लाख लोग
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बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में करीब 47.92 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि कुछ इलाकों में जलस्तर में कमी आने लगी है, लेकिन प्रशासन ने तेजी से घटते पानी को लेकर भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार जलस्तर में अचानक गिरावट से नदी किनारे कटाव और कमजोर तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ सकता है।

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    आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ का असर 15 जिलों के 87 से ज्यादा प्रखंडों और सैकड़ों पंचायतों तक पहुंच चुका है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। इनमें भागलपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर जैसे जिले गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

     

    गंगा समेत राज्य की कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। भागलपुर के सुल्तानगंज में शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 36.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से करीब 1.98 मीटर ऊपर था। हालांकि यहां पानी घटने की प्रवृत्ति देखी गई। इसके अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियों के कई स्थानों पर भी पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

     

    बाढ़ के दबाव का असर तटबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। भागलपुर के कई इलाकों में तटबंधों में कटाव और टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमों और स्थानीय लोगों की मदद से टूटे हिस्सों को नियंत्रित किया गया, जबकि अन्य संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत और सुरक्षा का काम जारी है। एक स्थान पर करीब 20 फीट तटबंध के कटने से पानी सड़क की ओर पहुंचने लगा था, जिसके बाद रेत की बोरियां, बांस और प्लास्टिक शीट लगाकर पानी के दबाव को कम करने की कोशिश की गई।

     

    बाढ़ के बीच राहत और बचाव अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है। राज्य में बड़ी संख्या में सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहां प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सूखा राशन, पॉलीथिन शीट और पशु चारा भी पहुंचाया गया है।

     

    लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य आपदा मोचन बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें भी अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। सड़क संपर्क टूटने वाले इलाकों में नावों के जरिए लोगों और आवश्यक सामान को पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

     

    इस बीच प्रशासन के सामने एक नई चुनौती तेजी से घटता जलस्तर भी है। सामान्य तौर पर पानी कम होने को राहत के संकेत के रूप में देखा जाता है, लेकिन बाढ़ के बाद कमजोर हो चुके नदी किनारों और तटबंधों पर अचानक दबाव बदलने से कटाव का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी कटाव की सूचना तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करने में बिहार के साथ-साथ नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश की भी भूमिका बताई गई है। लगातार बारिश के कारण नदियों और उनकी सहायक धाराओं में पानी बढ़ा, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर तेज हुआ। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

     

    बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। पानी कम होने के बाद अब राहत के साथ-साथ घरों, सड़कों, खेतों और तटबंधों को हुए नुकसान का आकलन भी जरूरी होगा। फिलहाल प्रशासन का जोर प्रभावित आबादी तक भोजन, चिकित्सा, पशु चारा और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ कमजोर तटबंधों और नदी किनारों की लगातार निगरानी पर है।

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