Last updated: October 8th, 2026 at 02:15 pm

बिहार में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। हालांकि कई जगहों पर पानी घटने का रुख भी दिख रहा है, लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। जल संसाधन विभाग लगातार नदियों के जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है।
8 अक्टूबर की स्थिति के अनुसार गंडक नदी गोपालगंज के डुमरियाघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। यहां खतरे का स्तर 62.22 मीटर है, जबकि जलस्तर करीब 62.23 मीटर दर्ज किया गया। इसी तरह कोसी नदी सुपौल के बीरपुर में 74.95 मीटर के आसपास रही, जबकि खतरे का निशान 74.70 मीटर है। कोसी कटिहार के कुर्सेला में भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई।
बिहार में गंगा की स्थिति भी कई जगहों पर गंभीर बनी हुई है। भागलपुर के कहलगांव, अजबाबाद और सुल्तानगंज जैसे निगरानी केंद्रों पर गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। सुल्तानगंज में जलस्तर करीब 35.71 मीटर रहा, जबकि खतरे का निशान 34.50 मीटर है। कहलगांव में भी नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर रहा, हालांकि कई स्थानों पर पानी घटने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है।
खगड़िया में बूढ़ी गंडक नदी भी चिंता बढ़ा रही है। यहां नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज हुआ। विभाग के आंकड़ों के अनुसार खगड़िया में जलस्तर करीब 36.87 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 36.58 मीटर है। राहत की बात यह है कि इस स्थान पर पानी घटने का ट्रेंड दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि कुछ इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ सकती है।
मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीवान, पश्चिम चंपारण और अन्य जिलों में भी अलग-अलग नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से नीचे आ चुकी हैं, लेकिन चेतावनी स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती तटबंधों की सुरक्षा और निचले इलाकों में पानी की स्थिति पर नजर रखना है।
पिछले दिनों बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने बड़े स्तर पर लोगों को प्रभावित किया था। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर देखा गया। कई जगहों पर घरों, सड़कों और खेतों में पानी पहुंचा था। प्रशासन की ओर से राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, नाव और जरूरी सामान की व्यवस्था की गई थी।
बाढ़ की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को होती है। खेतों में पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान का खतरा बना रहता है। वहीं तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए कटाव एक बड़ी चिंता है। पानी घटने के दौरान कई स्थानों पर मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन को केवल जलस्तर ही नहीं बल्कि तटबंधों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखनी पड़ रही है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति कुछ क्षेत्रों में सुधरती हुई दिखाई दे रही है, लेकिन कई प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण पूरी तरह राहत की स्थिति नहीं बनी है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन ने निगरानी और राहत व्यवस्था जारी रखी है।
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