Last updated: September 17th, 2026 at 02:32 pm

बिहार में रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम और यातायात की समस्या को कम करने के लिए रेलवे ओवरब्रिज यानी आरओबी परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने की तैयारी की गई है। राज्य में फिलहाल 58 आरओबी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से 47 परियोजनाएं पूर्व मध्य रेलवे के क्षेत्र से जुड़ी हैं। सरकार ने जून 2028 तक इनमें से 50 आरओबी परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इस दिशा में 16 सितंबर 2026 को एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें निर्माण कार्य की गति और रेलवे से जुड़े लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्य के सड़क निर्माण विभाग और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजनाओं में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों की समीक्षा की। अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।
आरओबी परियोजनाओं के निर्माण में केवल पुल का ढांचा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होता। रेलवे लाइन के आसपास कई तकनीकी काम भी पूरे करने पड़ते हैं। इनमें सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन व्यवस्था को स्थानांतरित करना, ट्रैक से जुड़ी बिजली व्यवस्था में बदलाव, रेलवे क्रॉसिंग को स्थानांतरित करना और निर्माण के दौरान ट्रैफिक ब्लॉक की अनुमति लेना शामिल है।
बैठक में इन्हीं मामलों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा पुल की डिजाइन और ड्राइंग, जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग यानी जीएडी, सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज और रेलवे की तकनीकी मंजूरियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इन प्रक्रियाओं में देरी होने पर निर्माण कार्य प्रभावित होता है, इसलिए अधिकारियों ने मंजूरी की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर जोर दिया।
बिहार में आरओबी परियोजनाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई प्रमुख शहरों और कस्बों में रेलवे क्रॉसिंग सड़क यातायात के लिए बड़ी बाधा बनती हैं। ट्रेन के गुजरने के दौरान फाटक बंद होने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। कई बार कुछ मिनटों के लिए बंद हुआ रेलवे फाटक खुलने के बाद भी यातायात सामान्य होने में काफी समय लग जाता है।
आरओबी तैयार होने के बाद सड़क यातायात को रेलवे लाइन से अलग रास्ता मिल जाता है। इससे वाहनों को रेलवे फाटक पर रुकने की जरूरत कम होती है और लोगों का सफर अधिक सुगम हो सकता है। खास तौर पर एंबुलेंस, स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
हालांकि, बिहार में कुछ आरओबी परियोजनाओं में देरी की समस्या भी सामने आती रही है। बक्सर जिले के चौसा में बन रहा रेलवे ओवरब्रिज इसका एक उदाहरण है। इस परियोजना का शिलान्यास 2022 में हुआ था, लेकिन जमीन से जुड़े मामलों सहित अन्य कारणों से इसकी समयसीमा कई बार आगे बढ़ी। हाल की जानकारी के अनुसार रेलवे से संबंधित हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि एप्रोच रोड और कुछ अन्य काम बाकी हैं।
इसी तरह की देरी को देखते हुए अब नई परियोजनाओं में रेलवे और राज्य की निर्माण एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के सामने लंबित तकनीकी मामलों को अलग-अलग करके उनकी स्थिति की समीक्षा की जा रही है, ताकि जिन मामलों में रेलवे की मंजूरी जरूरी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।
बैठक में परियोजनाओं के डिजाइन से जुड़े काम को तेज करने के लिए अलग डिजाइन विंग बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया। इसका उद्देश्य रेलवे को भेजे जाने से पहले डिजाइन और तकनीकी दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करना है, ताकि छोटी तकनीकी कमियों के कारण फाइलों को बार-बार वापस न करना पड़े और मंजूरी की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सके।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में पर्याप्त मानव संसाधन लगाने और परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलों की गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता किए बिना काम को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया गया है।
अगर जून 2028 तक 50 आरओबी परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो बिहार के कई हिस्सों में रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ी यातायात समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सरकार और रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित तकनीकी मंजूरियों, जमीन से जुड़े मामलों और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना है।
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