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बिहार में वाहन बीमा फर्जीवाड़े की जांच के लिए SIT गठित, चालान नियम भी हुए सख्त

बिहार में वाहन बीमा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया
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बिहार में वाहन बीमा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से यह कदम ऐसे मामलों की जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है, जिनमें दुर्घटना में शामिल नहीं रहे वाहनों को कथित तौर पर दुर्घटना से जोड़कर बीमा क्लेम लेने की कोशिश की जाती है। इसके साथ ही ट्रैफिक चालान जारी करने के नियमों को भी सख्त किया गया है।

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    नई व्यवस्था के तहत बीमा कंपनियों की ओर से संदिग्ध मामलों की जानकारी पुलिस को दिए जाने के बाद SIT उनकी जांच करेगी। जांच टीम दुर्घटना से जुड़े वाहन, घटना की परिस्थितियों, बीमा दस्तावेजों और क्लेम से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी ऐसे वाहन को तो दुर्घटना में शामिल नहीं दिखाया गया, जो वास्तव में उस घटना में मौजूद ही नहीं था।

     

    इस तरह के मामलों में कथित तौर पर पहले किसी दुर्घटना के लिए बीमित वाहन की जगह दूसरे वाहन को रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है और फिर उसके आधार पर बीमा कंपनी से मुआवजे का दावा किया जाता है। पुलिस अब ऐसे मामलों की जांच में वाहन और दुर्घटना से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ बीमा क्लेम की पूरी प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखेगी।

     

    वाहन बीमा फर्जीवाड़े की जांच के साथ ट्रैफिक चालान व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब चालान जारी करने के लिए स्पष्ट फोटो या वीडियो साक्ष्य जरूरी होगा। फोटो या वीडियो में यातायात नियम के उल्लंघन को साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए। इसके साथ ही रिकॉर्ड में उल्लंघन की तारीख, समय और स्थान भी स्पष्ट होना जरूरी होगा।

     

    पुलिस के अनुसार ट्रैफिक नियमों की निगरानी के लिए हैंडहेल्ड डिवाइस, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नई व्यवस्था का उद्देश्य चालान प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्य को अधिक स्पष्ट और सत्यापन योग्य बनाना है। केवल वाहन का नंबर दर्ज करके चालान जारी करने की व्यवस्था पर रोक लगाई गई है।

     

    हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे उल्लंघनों के मामलों में भी फोटो या वीडियो में नियम टूटते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई देना जरूरी होगा। यदि किसी पुलिसकर्मी की ओर से अस्पष्ट या अधूरे साक्ष्य के आधार पर चालान जारी किया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

     

    पुलिस मुख्यालय ने सड़क दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। जरूरी कानूनी और जांच संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दुर्घटना में शामिल वाहन को 24 घंटे के भीतर छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर व्यवस्था की गई है, जिसकी जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों को दी गई है।

     

    यदि किसी वाहन मालिक को दुर्घटना के बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वाहन छोड़ने में अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है, तो वह पुलिस मुख्यालय में शिकायत कर सकता है। अधिकारियों को इस व्यवस्था की निगरानी करने और अनावश्यक देरी की शिकायतों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    बिहार में लंबित ट्रैफिक चालानों के निपटारे पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 90 दिन से ज्यादा पुराने चालानों को 2026 की वन-टाइम ट्रैफिक चालान सेटलमेंट स्कीम के तहत नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निपटाने की व्यवस्था की गई है। 12 सितंबर को हुई नेशनल लोक अदालत में पुलिस द्वारा जारी 66,964 चालानों का निपटारा किया गया था।

     

    वाहन बीमा फर्जीवाड़े की जांच के लिए SIT और चालान व्यवस्था में नए नियम लागू किए जाने के बाद अब संदिग्ध बीमा दावों, यातायात उल्लंघनों के साक्ष्य और दुर्घटना में शामिल वाहनों की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ेगी। पुलिस की ओर से इन व्यवस्थाओं के जरिए बीमा दावों की जांच और ट्रैफिक नियमों के प्रवर्तन को अधिक दस्तावेजी और साक्ष्य आधारित बनाने पर जोर दिया गया है।

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