Last updated: October 25th, 2026 at 04:24 am

बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की आठ सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है। अब सभी प्रत्याशियों की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है। इस चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं और 5.32 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पंजीकृत थे। मतदान 23 अक्टूबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में अधिक उत्साह दिखाया। इन नतीजों को बिहार की राजनीतिक पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, आठ सीटों के लिए कुल 5,32,847 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 3,86,199 पुरुष, 1,46,611 महिलाएं और 37 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल थे। मतदान के लिए पूरे राज्य में 933 केंद्र बनाए गए थे। इनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे तक चला।
शिक्षक कोटे की चार सीटों पर कुल 74.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि स्नातक कोटे की चार सीटों पर 43.87 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। इस तरह दोनों श्रेणियों में मतदान के प्रतिशत के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। हालांकि, केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी प्रत्याशी की जीत का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अंतिम परिणाम मतों की गिनती और निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सारण सीट पर सबसे अधिक 87.16 प्रतिशत मतदान हुआ। दरभंगा शिक्षक सीट पर 79 प्रतिशत, तिरहुत शिक्षक सीट पर 78.19 प्रतिशत और पटना शिक्षक सीट पर 56.89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कोसी सीट पर 52.51 प्रतिशत मतदान हुआ। तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना स्नातक सीट पर 36.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ये आंकड़े प्रारंभिक रिपोर्टों पर आधारित हैं और इनमें संशोधन संभव है।
चुनाव में चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 60 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। स्नातक सीटों में दरभंगा में सबसे अधिक 40 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। पटना में 18, तिरहुत में 17 और कोसी में 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। शिक्षक सीटों में पटना और सारण में 18-18, दरभंगा में 13 तथा तिरहुत में 11 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है।
इस चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र विशेष रूप से चर्चा में रहा। यहां जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी और मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार के सामने जन सुराज पार्टी के अनुज सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। मोकामा के विधायक अनंत सिंह द्वारा अनुज सिंह को समर्थन देने से इस मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था। इस घटनाक्रम ने जदयू के भीतर मतभेदों को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया।
जन सुराज पार्टी ने सभी आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विपक्षी महागठबंधन के घटक दलों के बीच कुछ सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार होने के कारण मतों के बंटवारे की संभावना भी चर्चा में रही है। हालांकि, इन राजनीतिक समीकरणों का वास्तविक प्रभाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इन आठ सीटों के मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने वाला है। ऐसे में 27 अक्टूबर की मतगणना के बाद बिहार विधान परिषद में इन निर्वाचन क्षेत्रों के नए प्रतिनिधियों की तस्वीर साफ हो जाएगी। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम राज्य की राजनीतिक पार्टियों के लिए आगामी रणनीति के लिहाज से भी अहम होंगे।
मतदान के बाद सभी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को मतगणना का इंतजार है। 27 अक्टूबर को होने वाली गिनती से पता चलेगा कि किन उम्मीदवारों को मतदाताओं का समर्थन मिला और बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर किसे प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
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