Last updated: October 23rd, 2026 at 03:10 pm

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान के दौरान शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को पटना जिले के मोकामा में राजनीतिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के बीच मोकामा प्रखंड कार्यालय स्थित मतदान केंद्र के पास जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई कहासुनी ने जल्द ही विवाद का रूप ले लिया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। घटना के दौरान मतदान केंद्र के आसपास कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा।
घटना की सूचना मिलने पर एसडीपीओ राम कृष्ण पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों को समझाने की कोशिश की और मतदान केंद्र के आसपास जमा भीड़ को हटाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताई गई है। पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और मतदान प्रक्रिया को जारी रखने पर ध्यान दिया गया।
मोकामा में हुए विवाद की वजह पटना स्नातक सीट पर चल रहा राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है। इस सीट से जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज पार्टी की ओर से डॉ. अनुज सिंह चुनाव मैदान में हैं। मोकामा के विधायक और जेडीयू नेता अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय अनुज सिंह का समर्थन किया है। इसी कारण इस सीट पर मुकाबला राजनीतिक रूप से काफी चर्चित हो गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मतदान केंद्र के पास दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच मतदाताओं को प्रभावित करने और वोट डालने से रोकने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य मानने से पहले पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद पहले से चर्चा में रहे हैं। अनंत सिंह ने पटना स्नातक सीट पर जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया है। दूसरी ओर, नीरज कुमार अपनी जीत को लेकर भरोसा जताते रहे हैं। एक ही राजनीतिक दल से जुड़े नेताओं के बीच यह मतभेद चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है। मोकामा में समर्थकों के बीच हुई झड़प ने इस राजनीतिक खींचतान को मतदान के दिन फिर सुर्खियों में ला दिया।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया गया। इनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में थे और मतदान के लिए 933 केंद्र बनाए गए थे। निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक सीटों के साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक सीटें शामिल थीं। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव आम विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इनमें संबंधित नियमों के तहत पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं। ऐसे चुनावों में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दों और संगठित मतदाता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए मतदान केंद्रों के आसपास किसी भी तरह का विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।
मोकामा की घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मतदान केंद्रों के आसपास अनुशासन बनाए रखने की जरूरत को फिर उजागर किया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को बिना दबाव, डर या बाधा के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए। पुलिस और निर्वाचन प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मतदान केंद्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच हो।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मोकामा में स्थिति नियंत्रित किए जाने की खबर है। घटना से जुड़े आरोपों और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जिससे पता चलेगा कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं ने किस उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि चुना है।
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