Last updated: October 23rd, 2026 at 03:08 pm

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इस चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनकी राजनीतिक किस्मत का फैसला अब मतगणना के दिन होगा। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, मतों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी। इन चुनावों को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके परिणाम से विभिन्न राजनीतिक दलों की स्थिति और गठबंधन के भीतर उनकी ताकत का आकलन भी होगा।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, आठों सीटों के लिए कुल 5,32,847 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 4,92,594 मतदाता स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और 40,253 मतदाता शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े थे। मतदान के लिए राज्यभर में 933 केंद्र बनाए गए थे। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और निर्धारित समय शाम चार बजे तक चला। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए थे।
मतदान के अंतिम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 43.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत लगभग 74.55 रहा। दोनों श्रेणियों में मतदान के अंतर ने चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक मतदान के पीछे मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और सीमित लेकिन संगठित मतदाता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, मतदान प्रतिशत से किसी उम्मीदवार की जीत का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
चुनाव के तहत पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराया गया। इसके साथ ही पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट डाले। इन सीटों पर मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने वाला है। इसी वजह से निर्वाचन प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार पूरी कराई जा रही है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस बार चुनाव का प्रमुख केंद्र बना रहा। यहां जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के बीच मुकाबले पर खास नजर रही। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस घटनाक्रम ने चुनाव को केवल उम्मीदवारों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पार्टी के भीतर राजनीतिक मतभेदों को भी चर्चा में ला दिया।
नीरज कुमार पहले भी इस सीट से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और लगातार चौथी बार जीत हासिल करने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर, अनुज सिंह को मिले समर्थन से पटना स्नातक सीट का मुकाबला और दिलचस्प हो गया। इस निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य दलों के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे। अब मतगणना से ही स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
भारतीय जनता पार्टी ने चार निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे, जबकि जेडीयू ने बाकी चार सीटों पर अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी ने भी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश की। विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला बहुकोणीय रहा।
विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव आम विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें मतदान का अधिकार संबंधित नियमों के तहत पंजीकृत स्नातकों और शिक्षकों को मिलता है। इसलिए उम्मीदवारों को व्यापक जनसभाओं के साथ-साथ शिक्षकों, स्नातकों और संबंधित पेशेवर समूहों तक पहुंच बनानी पड़ती है। स्थानीय मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, शिक्षकों की समस्याएं और प्रतिनिधियों की उपलब्धता जैसे विषय भी चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अब सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की निगाहें 27 अक्टूबर की मतगणना पर टिकी हैं। नतीजों से पता चलेगा कि किस दल को कितनी सीटों पर सफलता मिली और किस उम्मीदवार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का भरोसा जीता। खास तौर पर पटना स्नातक सीट का परिणाम जेडीयू के अंदरूनी मतभेदों और जन सुराज पार्टी की चुनावी दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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