Last updated: June 15th, 2026 at 05:39 pm

भारत और स्लोवाकिया के संबंधों में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “कॉम्प्रिहेन्सिव पार्टनरशिप” के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने स्लोवाकिया की यात्रा की है, जिससे इस घटनाक्रम का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल तकनीक, श्रम प्रवासन, उच्च शिक्षा, विज्ञान, पर्यटन और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच साझा विश्वास, साझा प्राथमिकताएं और साझा भविष्य दोनों देशों को एक-दूसरे के और करीब लाते हैं। उन्होंने कहा कि संबंधों को कॉम्प्रिहेन्सिव पार्टनरशिप तक पहुंचाना केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं बल्कि भविष्य के सहयोग का मजबूत आधार है।
वार्ता के दौरान रक्षा सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट को अंतिम रूप दिया। भारत और स्लोवाकिया का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
इसके अलावा डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कम्युनिकेशन और नवाचार के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और निवेश को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इससे तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत और स्लोवाकिया ने श्रम प्रवासन और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए भी समझौता किया है। दोनों पक्षों ने कुशल पेशेवरों के सुरक्षित और कानूनी आवागमन को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। साथ ही सामाजिक सुरक्षा समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने का निर्णय लिया गया ताकि दोनों देशों में काम करने वाले पेशेवरों को बेहतर संरक्षण मिल सके।
आर्थिक सहयोग भी वार्ता का प्रमुख विषय रहा। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के शीघ्र कार्यान्वयन का समर्थन किया। उनका मानना है कि इससे व्यापार, निवेश, स्टार्टअप और उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिलेगा। स्लोवाकिया ने इस समझौते को महत्वाकांक्षी आर्थिक पहल बताते हुए इसके क्रियान्वयन का समर्थन किया।
ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। परमाणु ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर साझेदारी मजबूत करने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा भारत की यूरोप नीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ बढ़ते संबंध भारत को आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर नए अवसर प्रदान कर सकते हैं। स्लोवाकिया के साथ बढ़ती साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
फिलहाल भारत और स्लोवाकिया के बीच संबंधों को कॉम्प्रिहेन्सिव पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। 11 समझौतों के माध्यम से शुरू हुआ यह नया सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार, तकनीक, रक्षा और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम ला सकता है। दोनों देशों के नेताओं ने भी इसे भविष्य की मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
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