Last updated: July 3rd, 2026 at 04:39 pm

भारत और जापान ने अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने 15 वर्ष पुराने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) की समीक्षा और उन्नयन पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई वार्ता में दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। दोनों देशों ने माना कि मौजूदा CEPA को नई वैश्विक व्यापारिक आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करना समय की मांग है।
बैठक के दौरान आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) पर एक संयुक्त घोषणा और सहयोग का रोडमैप भी जारी किया गया। इसके तहत दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत प्रौद्योगिकी, डिजिटल अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ाएंगे। दोनों नेताओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।
भारत सरकार का मानना है कि जापान लंबे समय से देश के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल रहा है। आने वाले वर्षों में जापानी निवेश को और बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी उद्योग जगत से भारत में अपने निवेश और विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है और जापानी कंपनियों के लिए यहां व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
शिखर सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वास्थ्य, रक्षा प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी कई नई साझेदारियों की घोषणा की गई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भविष्य की आर्थिक वृद्धि केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान आधारित सहयोग पर भी निर्भर करेगी। इसके अलावा दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने को रणनीतिक प्राथमिकता बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों देशों का सहयोग निवेश, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के नए अवसर पैदा कर सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, CEPA के उन्नयन से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश नियमों में सुधार और व्यापारिक बाधाओं को कम करने से भारतीय और जापानी कंपनियों को लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बनने की उम्मीद है।
भारत और जापान ने आर्थिक सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत का संकेत दिया है। यदि CEPA का उन्नयन और प्रस्तावित निवेश योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता, निर्यात और रोजगार सृजन को भी नई गति मिलने की संभावना है।
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