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मुरादाबाद में तेंदुए का आतंक, घर के बाहर सो रहे किसान को बनाया शिकार

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए के हमलों से ग्रामीणों में दहशत लगातार बढ़ती जा
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मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए के हमलों से ग्रामीणों में दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। बहापुर बलिया गांव में शुक्रवार रात घर के बाहर चारपाई पर सो रहे किसान जगराज सिंह पर तेंदुए ने कथित तौर पर हमला कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुआ किसान को उठाकर खेत की ओर ले गया। शनिवार सुबह खेत में उनका खून से लथपथ शव मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की है।

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    बताया जा रहा है कि जगराज सिंह रात में अपने घर के बाहर सो रहे थे। देर रात किसी समय तेंदुआ वहां पहुंचा और कथित तौर पर उन्हें अपना शिकार बना लिया। परिवार और आसपास रहने वाले लोगों को घटना की तत्काल जानकारी नहीं हो सकी। सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए तो उन्हें वहां जगराज सिंह का शव दिखाई दिया। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस और वन विभाग को दी गई।

    ग्रामीणों के अनुसार, शव पर जंगली जानवर के हमले के निशान मिले हैं। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में भय का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार तेंदुए के हमलों के कारण अब लोग रात में घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।

    इस घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि बहापुर बलिया गांव में तेंदुए के हमले से यह तीसरी मौत बताई जा रही है। इससे पहले भी इसी गांव में दो महिलाओं की मौत तेंदुए के हमले में होने की जानकारी सामने आई थी। 25 अगस्त को 52 वर्षीय मिथलेश देवी खेत में काम कर रही थीं, तभी तेंदुए ने उन पर हमला किया और उनकी मौत हो गई थी।

    ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में पिछले करीब 25 दिनों के दौरान तेंदुए के हमलों में चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। इससे आसपास के गांवों में भी डर बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेतों में जाना भी जोखिम भरा महसूस हो रहा है, जबकि खेती-किसानी के काम को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है।

    ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी सीधे खेतों और पशुपालन से जुड़ी है। किसानों को फसल देखने, सिंचाई करने और पशुओं के लिए चारा लाने के लिए खेतों तक जाना पड़ता है। लेकिन तेंदुए की मौजूदगी के कारण लोग अकेले खेतों की तरफ जाने से बच रहे हैं। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को भी घर से बाहर भेजने में सावधानी बरत रहे हैं।

    तेंदुए के हमलों का असर गांवों की सामान्य गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। शाम होते ही ग्रामीण अपने घरों में रहने की कोशिश कर रहे हैं। रात में गांव की गलियों और खेतों के आसपास आवाजाही काफी कम हो गई है। लोगों में यह डर बना हुआ है कि तेंदुआ किसी भी समय आबादी के नजदीक पहुंच सकता है।

    स्थिति को देखते हुए वन विभाग की टीमें इलाके में निगरानी कर रही हैं। तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए ट्रैप कैमरों, थर्मल ड्रोन और पिंजरों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले भी क्षेत्र में कुछ तेंदुओं को रेस्क्यू किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद हमलों का सिलसिला पूरी तरह रुक नहीं पाया है।

    वन विभाग और पुलिस की ओर से ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। लोगों से अकेले खेतों की ओर न जाने, विशेष रूप से रात में बाहर निकलने से बचने और आसपास तेंदुआ दिखाई देने पर तुरंत अधिकारियों को सूचना देने की अपील की जा रही है।

    ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बीच केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है और तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई तेज की जानी चाहिए। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि कई हमलों के बाद भी वे अपने घरों और खेतों में पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र चुनौतीपूर्ण है। मुरादाबाद और आसपास के इलाकों में खेत, गन्ने की फसल, नदी क्षेत्र और गांव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे भू-दृश्य में तेंदुओं को छिपने और आबादी के करीब आने के लिए उपयुक्त स्थान मिल सकते हैं।

    हालांकि किसी तेंदुए को आधिकारिक रूप से ‘आदमखोर’ घोषित करने या किसी विशेष जानवर को इन सभी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले वन विभाग की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों की आवश्यकता होती है। इसलिए अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही की जानी चाहिए।

    जगराज सिंह की मौत ने गांववालों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि इस बार घटना खेत में काम करने के दौरान नहीं बल्कि घर के बाहर सोते समय होने की बात सामने आई है। इससे ग्रामीणों को आशंका है कि तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्रों में भी बेखौफ घूम रहा है।

    अब प्रशासन और वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई इस तरह करनी होगी कि लोगों और वन्यजीव दोनों के लिए जोखिम कम रहे।

    बहापुर बलिया और आसपास के गांवों में लोग तेंदुए की गतिविधियों को लेकर बेहद सतर्क हैं। वन विभाग की निगरानी और रेस्क्यू अभियान के परिणाम पर ग्रामीणों की नजर है। लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि तेंदुए को जल्द पकड़ा जाए, ताकि किसान बिना डर के खेतों में जा सकें और परिवार अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें।

    मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए के हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बहापुर बलिया गांव में घर के बाहर सो रहे किसान जगराज सिंह की मौत के बाद इलाके में दहशत और गहरी हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 25 दिनों में क्षेत्र में तेंदुए के हमलों से चार लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग तेंदुए की तलाश के लिए कैमरों, थर्मल ड्रोन और पिंजरों की मदद ले रहा है, जबकि ग्रामीण जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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