Last updated: September 14th, 2026 at 12:19 pm

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश कॉरपोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज यानी UPCOS की शुरुआत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी व्यवस्था, समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था से कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवारों को मिलाकर करीब 17 से 20 लाख लोगों को लाभ मिल सकता है।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की नियुक्ति, तैनाती, उपस्थिति, वेतन और दूसरी सेवा संबंधी जानकारियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अलग-अलग विभागों और निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के बीच बिखरी जानकारी को एक जगह लाने में मदद मिलेगी। कर्मचारियों के लिए UPCOS पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां वे अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे।
सबसे बड़ा बदलाव वेतन भुगतान को लेकर बताया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खाते में हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे वेतन में होने वाली अनियमितताओं और बीच में कटौती की शिकायतों को कम किया जा सकेगा। साथ ही EPF और ESI का योगदान भी नियमित रूप से जमा कराने की बात कही गई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा लिया जाने वाला सर्विस चार्ज कर्मचारी के वेतन से नहीं काटा जाएगा। इसका भुगतान सरकार की ओर से किया जाएगा। इससे उन मामलों पर रोक लगाने की कोशिश की गई है जिनमें कर्मचारी को कागजों पर तय रकम से कम भुगतान मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था में प्रावधान बताए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, कोई आउटसोर्सिंग कंपनी किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से हटाने की प्रक्रिया नहीं अपना सकेगी। किसी कर्मचारी को हटाने से पहले सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी और मामले की जांच की जाएगी। यदि कंपनी की शिकायत या रिपोर्ट गलत पाई जाती है तो कर्मचारी को परेशान नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। सरकार के अनुसार, ESI के माध्यम से कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जहां ESI अस्पताल में किसी उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां आयुष्मान भारत से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा तथा दुर्घटना बीमा की सुविधाएं भी घोषित की गई हैं। अलग-अलग श्रेणियों में दुर्घटना बीमा की राशि 20 से 40 लाख रुपये तक बताई गई है।
इसके अलावा आपातकालीन चिकित्सा, एयर एंबुलेंस और परिवार से जुड़े कुछ सामाजिक लाभों का भी प्रावधान बताया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं और शिकायतों को भी एक संस्थागत प्रणाली के तहत लाया जाएगा।
इस व्यवस्था के पीछे सरकार का एक बड़ा उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों और निजी एजेंसियों के बीच मौजूद मध्यस्थ व्यवस्था को कम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई प्रणाली में कर्मचारियों के अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा या सिफारिश पर निर्भर नहीं रहने चाहिए। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए सरकार कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर भुगतान और अन्य सेवा लाभों की निगरानी कर सकेगी।
नई व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे अलग-अलग विभागों और जिलों में कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। कर्मचारियों को समय पर वेतन, EPF-ESI और बीमा जैसी सुविधाएं वास्तव में नियमित रूप से मिलती हैं या नहीं, इसकी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल UPCOS के लॉन्च के साथ राज्य के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक केंद्रीकृत और डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत की गई है।
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