Last updated: September 29th, 2026 at 10:03 am

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल योजनाओं के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत के लिए 1 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। यह अभियान 10 नवंबर 2026 तक चलेगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पाइपलाइन के काम के कारण खोदी या क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाए।
इस अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की उन सड़कों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए पाइपलाइन डालने के दौरान खोदा गया था। कई जगहों पर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। सरकार ने अब ऐसे मामलों में सड़क बहाली के काम को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर जोर दिया है।
जलशक्ति विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अभियान के दौरान सड़क मरम्मत के काम की नियमित निगरानी की जाए और काम निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरा कराया जाए। संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों की पहचान कर उन्हें तय समय सीमा के भीतर पूरा कराने पर ध्यान देने को कहा गया है।
इस अभियान की एक खास बात यह है कि ग्रामीणों को भी सड़क मरम्मत की निगरानी में शामिल किया जा रहा है। इसके लिए जल सारथी ऐप पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी गांव में सड़क खराब है या मरम्मत का काम ठीक तरीके से नहीं हुआ है, तो ग्रामीण मौके की फोटो और वीडियो अपलोड करके शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इससे अधिकारियों को सड़क की वास्तविक स्थिति की जानकारी सीधे मौके से मिल सकेगी।
सरकार ने शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। 10 नवंबर के बाद यदि सड़क मरम्मत से संबंधित शिकायत सामने आती है, तो केवल संबंधित एजेंसी ही नहीं बल्कि जिम्मेदार अभियंता की जवाबदेही भी तय की जाएगी। अधिकारियों को पेयजल योजनाओं से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण सड़कों की स्थिति सीधे लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही से जुड़ी होती है। सड़क खराब होने से ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। बारिश के दौरान ऐसी सड़कों पर कीचड़ और जलभराव की समस्या भी बढ़ जाती है। इसलिए पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद सड़क को जल्द से जल्द पहले जैसी स्थिति में लाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
सड़क मरम्मत के साथ ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिन गांवों में अभी तक पेयजल सुविधा नहीं पहुंची है, वहां लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को योजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सड़क बहाली केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं होनी चाहिए। पाइपलाइन डालने के बाद सड़क को निर्धारित मानकों के अनुसार बहाल करना होगा और काम की नियमित निगरानी करनी होगी। डिजिटल शिकायत व्यवस्था के जरिए स्थानीय लोगों को भी काम की स्थिति बताने का माध्यम मिलेगा।
अभियान की निर्धारित अवधि 1 अक्टूबर से 10 नवंबर तक है। इस दौरान विभागीय अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मरम्मत के काम की प्रगति पर नजर रखेंगे। वहीं ग्रामीण जल सारथी ऐप के जरिए सड़क की स्थिति की जानकारी और शिकायत विभाग तक पहुंचा सकेंगे।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के विस्तार के साथ पाइपलाइन बिछाने के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की बहाली भी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी बन गई है। नए अभियान के तहत सड़क मरम्मत, डिजिटल शिकायत और अधिकारियों की जवाबदेही—इन तीनों पहलुओं पर एक साथ जोर दिया गया है।
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