Last updated: October 8th, 2026 at 02:00 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले के बाद रुहेलखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कश्यप ने पार्टी छोड़ने के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनका विरोध करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने को बड़ी वजह बताया है।
धर्मेंद्र कश्यप का नाम पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में था। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर एक पोस्ट साझा की थी। इसके बाद से ही उनके बीजेपी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। उस समय उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की थी, लेकिन अब उन्होंने मीडिया के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
कश्यप ने अपनी नाराजगी की वजह बताते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने खुले तौर पर उनका विरोध किया और उन्हें हराने के लिए काम किया, अगर उन्हीं लोगों को बाद में पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिए जाते हैं तो इससे उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ संगठन की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर उनके जैसे व्यक्ति के लिए पार्टी से अलग होने का फैसला लेना स्वाभाविक है।
धर्मेंद्र कश्यप ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस राजनीतिक दल में शामिल होंगे। हालांकि, उनके अगले कदम को लेकर समाजवादी पार्टी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। कश्यप की हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकातों की भी चर्चा रही है। इसी वजह से उनके सपा में वापस जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक किसी पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
कश्यप ने कहा है कि वह आगे का फैसला अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद लेंगे। उनके अनुसार, बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में समर्थकों के साथ बैठकें की जाएंगी और उनकी राय जानने के बाद ही अगले राजनीतिक कदम की औपचारिक घोषणा होगी। यानी फिलहाल उन्होंने बीजेपी छोड़ने का फैसला स्पष्ट कर दिया है, लेकिन अगली पार्टी को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा रहा है। उन्होंने वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आंवला सीट से बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। 2019 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव जीतकर संसद में अपनी जगह बनाई। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कश्यप को रुहेलखंड क्षेत्र में कश्यप समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में उनका बीजेपी से अलग होना सिर्फ व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। खासकर आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दल अब उनके अगले कदम पर नजर रखेंगे।
उनकी नाराजगी का एक और महत्वपूर्ण पहलू राज्यसभा चुनाव से भी जुड़ा है। उत्तर प्रदेश से बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी की, लेकिन उसमें धर्मेंद्र कश्यप का नाम शामिल नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक कश्यप को राज्यसभा टिकट मिलने की उम्मीद थी। सूची जारी होने के बाद उनकी ‘टाटा बाय-बाय’ पोस्ट सामने आई और इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि धर्मेंद्र कश्यप का अगला राजनीतिक ठिकाना क्या होगा। अगर वह समाजवादी पार्टी में लौटते हैं तो इससे रुहेलखंड क्षेत्र में सपा को एक ऐसा नेता मिल सकता है, जिसका अपने समाज और क्षेत्र में राजनीतिक आधार रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी के लिए यह नुकसान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं।
धर्मेंद्र कश्यप ने इतना साफ कर दिया है कि वह बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे नहीं बढ़ाएंगे। अब समर्थकों से बातचीत और अगले राजनीतिक दल को लेकर उनकी घोषणा का इंतजार है। उनके अगले कदम से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण बन सकते हैं।
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