Last updated: September 30th, 2026 at 12:17 pm

उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिन मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद कई इलाकों में धूप निकलने से तापमान और उमस बढ़ी है, वहीं कुछ जिलों में बुधवार को बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम खराब होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है।
30 सितंबर को पश्चिमी और उत्तरी उत्तर प्रदेश के वातावरण में ऊपरी हवा के स्तर पर बना परिसंचरण मौसम में बदलाव का एक कारण बताया गया है। इसके प्रभाव से कुछ इलाकों में बादल छाने, गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, एक अन्य पूर्वानुमान में पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों के लिए भारी बारिश का कोई अलग चेतावनी स्तर जारी नहीं होने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि पूरे प्रदेश में एक जैसी बारिश की स्थिति नहीं रहेगी और मौसम जिलेवार अलग-अलग रह सकता है।
मौसम विभाग से जुड़ी रिपोर्टों में बिजनौर, महाराजगंज, आगरा, बहराइच, मेरठ, सिद्धार्थनगर, सहारनपुर, गोरखपुर, अलीगढ़ और मथुरा जैसे जिलों में बारिश और आंधी की संभावना बताई गई है। कुछ स्थानों पर तेज हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक तक पहुंचने की संभावना भी बताई गई है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और किसानों को मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया। मंगलवार की सुबह कुछ इलाकों में कम दृश्यता के कारण दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे और बागपत-मेरठ मार्ग पर वाहनों की रफ्तार प्रभावित हुई थी। बारिश के बाद धूप निकलने से अब कई क्षेत्रों में उमस बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
लखनऊ में 30 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम में बादल और स्थानीय बारिश की स्थिति के कारण तापमान में मामूली बदलाव हो सकता है। राजधानी के साथ आसपास के जिलों में भी मौसम पर नजर रखी जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश और आंधी की संभावना के कारण किसानों के लिए मौसम का बदलाव महत्वपूर्ण है। सितंबर के आखिरी दिनों में कई इलाकों में खेतों में खरीफ फसलें मौजूद हैं। तेज हवा और बारिश के कारण तैयार फसलों को नुकसान हो सकता है। वहीं जिन क्षेत्रों में पहले से पानी जमा है, वहां अतिरिक्त बारिश से जलनिकासी की समस्या बढ़ सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बहराइच जैसे क्षेत्रों में बारिश होने की स्थिति में पहले से प्रभावित निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। खासकर कुशीनगर और आसपास के इलाकों में नारायणी नदी से जुड़ी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के लिए मौसम पर लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है।
मानसून की विदाई के दौर में मौसम का यह बदलाव सामान्य से अलग-अलग तरीके से दिखाई दे रहा है। देश के कई हिस्सों में बारिश जारी है, जबकि कुछ उत्तर भारतीय क्षेत्रों में मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगा है। मौसम विभाग के अलग-अलग पूर्वानुमानों में भी उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवा की स्थिति में लोगों को खुले मैदान, पेड़ या कमजोर निर्माण वाले स्थानों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों के लिए भी मौसम की स्थानीय जानकारी देखते हुए खेतों में जरूरी काम की योजना बनाना उपयोगी रहेगा। तेज हवा की स्थिति में बिजली के तारों और पेड़ों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। कुछ जिलों में बारिश और आंधी की संभावना है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में बारिश के बाद उमस और तापमान बढ़ने की स्थिति बन सकती है। आने वाले दिनों में मानसून की विदाई के साथ बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना पर नजर बनी रहेगी।
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