Last updated: October 7th, 2026 at 03:00 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर अब गंभीर चिंता का कारण बन गया है। नदी का पानी शहर के कई रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि गोमती नगर विस्तार की कुछ पॉश कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कई परिवारों ने आसपास के होटलों में कमरे लेकर अस्थायी रूप से रहने का फैसला किया है।
सबसे ज्यादा असर गोमती नगर विस्तार और फैजुल्लागंज जैसे इलाकों में दिखाई दे रहा है। गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 की आर्क्सेला रिसॉर्टिको कॉलोनी पानी से घिर गई है। यहां सड़कें और खुले क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कॉलोनी के अधिकांश परिवार अपना सामान लेकर सुरक्षित जगहों की ओर चले गए हैं। कई परिवार आसपास के होटलों में ठहरे हुए हैं।
फैजुल्लागंज में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। कई कॉलोनियों में पानी कई फीट तक पहुंच गया है। गणेश विहार जैसी कॉलोनियों में लोगों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों को जरूरी सामान लेने के लिए भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर लोग ट्रैक्टर के जरिए आने-जाने को मजबूर हैं और इसके लिए किराया भी देना पड़ रहा है।
बाढ़ का असर लखनऊ के प्रमुख इलाकों और सार्वजनिक स्थानों तक भी पहुंच गया है। गोमती नगर स्थित इकाना स्टेडियम की पार्किंग में पानी भर गया है। प्लासियो मॉल के आसपास भी गोमती का पानी पहुंच गया। इसके बाद ट्रैफिक विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी और प्रभावित मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया। इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाले रास्ते पर पानी भरने के कारण वाहनों की रफ्तार प्रभावित हुई है।
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी दिखाई दे रहा है। कुड़ियाघाट, गोमती रिवरफ्रंट और चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास पानी पहुंच चुका है। लेटे हुए हनुमान मंदिर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। चंद्रिका देवी मंदिर तक पहुंचने वाले प्रमुख रास्तों में भी पानी भरने की जानकारी सामने आई है।
लखनऊ में आई बाढ़ का एक बड़ा कारण शहर में हाल की बारिश से ज्यादा गोमती नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश को बताया जा रहा है। गोमती के ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में सितंबर के अंतिम सप्ताह में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश हुई। इससे नदी और उसकी सहायक धाराओं में पानी बढ़ा और यह पानी धीरे-धीरे लखनऊ की ओर पहुंचा। शहर में हाल के दिनों में ज्यादा बारिश नहीं होने के बावजूद नदी का जलस्तर बढ़ने का यही प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में नावें लगाई गई हैं और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रैन बसेरों और राहत शिविरों की व्यवस्था भी की जा रही है। भोजन और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि गोमती का जलस्तर और बढ़ता है या स्थिर होता है। प्रशासन प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। वहीं स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने के साथ अपने घर और सामान की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। लखनऊ में गोमती की बाढ़ ने इस बार शहर के उन इलाकों को भी प्रभावित किया है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित और विकसित आवासीय क्षेत्र माना जाता है।
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