Last updated: October 7th, 2026 at 03:07 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत तैयार किया जा रहा शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर दिवाली से पहले आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है। डालीगंज और पक्का पुल के बीच बने इस फ्लाईओवर के शुरू होने से पुराने लखनऊ के करीब 10 लाख लोगों को जाम और लंबे सफर से राहत मिलने की उम्मीद है।
यह फ्लाईओवर पक्का पुल यानी हर्डिंग ब्रिज से डालीगंज रोटरी के बीच बनाया गया है। इसकी लंबाई करीब 1.1 किलोमीटर है और यह दो लेन का है। रेलवे ब्रिज के ऊपर बने इस फ्लाईओवर की जमीन से ऊंचाई लगभग 25 मीटर है। इसी ऊंचाई के कारण इसे लखनऊ का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर बताया जा रहा है। फ्लाईओवर का मुख्य ढांचा तैयार हो चुका है और फिलहाल डामरीकरण तथा स्ट्रीट लाइट लगाने का काम चल रहा है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर के अंत तक बचे हुए काम पूरे करने की योजना है, ताकि दीपावली से पहले फ्लाईओवर पर यातायात शुरू किया जा सके। इसके चालू होने के बाद डालीगंज से पक्का पुल तक का सफर करीब दो मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। इससे इस मार्ग पर रोजाना आने-जाने वाले लोगों का काफी समय बच सकता है।
फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले इलाकों को मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक इसके शुरू होने से पक्का पुल से समतामूलक चौराहे तक सीधा आवागमन संभव होगा। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने और कई प्रमुख स्थानों के बीच यातायात को तेज करने में मदद मिल सकती है। लगभग 10 लाख लोगों की आबादी को इस परियोजना से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर पर वाहनों के चढ़ने और उतरने के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए इंटीग्रेटेड रोटरी भी बनाई जाएगी। टीले वाली मस्जिद के पास नई रोटरी बनाने की योजना है। इसके अलावा मरी माता मंदिर के पास पहले से बनी रोटरी को दोबारा डिजाइन करके वाहनों के लिए चार लेन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य फ्लाईओवर से आने-जाने वाले वाहनों को सुरक्षित और सुगम रास्ता देना है।
इस ट्रैफिक व्यवस्था की तकनीकी डिजाइन के लिए IIT BHU और VNIT नागपुर की संयुक्त टीम से सर्वे कराया गया है। विशेषज्ञों की मदद से तैयार डिजाइन के आधार पर रोटरी और आसपास के जंक्शन को विकसित किया जाएगा। इससे फ्लाईओवर शुरू होने के बाद जाम या वाहनों के आपस में टकराने की समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है।
इस परियोजना का संबंध लखनऊ के बड़े ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट से भी है। गोमती नदी के किनारे विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच तेज और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था तैयार करना है। फिलहाल कॉरिडोर के कुछ हिस्सों पर आवागमन शुरू हो चुका है, जबकि पक्का पुल से डालीगंज वाला हिस्सा अभी पूरी तरह चालू नहीं हुआ है।
पक्का पुल को लेकर भी भविष्य की योजना तैयार की गई है। गोमती नदी पर नए पुल का निर्माण पूरा होने के बाद पुराने पक्का पुल पर वाहनों का प्रवेश बंद करने का प्रस्ताव है। पुराने पुल को पैदल यात्रियों के लिए पेडेस्ट्रियन ब्रिज के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इससे ऐतिहासिक पुल को संरक्षित रखने के साथ-साथ लोगों को नदी के आसपास बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।
दिवाली से पहले फ्लाईओवर शुरू होने की स्थिति में लखनऊ के लोगों को एक साथ बेहतर कनेक्टिविटी और ट्रैफिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम रूप से यातायात शुरू होने की तारीख निर्माण के बाकी काम पूरे होने और जरूरी व्यवस्थाओं के तैयार होने पर निर्भर करेगी।
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