Last updated: July 4th, 2026 at 03:34 pm

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत का मध्यम वर्ग (Middle Class) देश की आर्थिक वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि घरेलू खपत (Domestic Consumption), बचत, निवेश और उद्यमिता में मध्यम वर्ग की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने ऐसी आर्थिक नीतियां अपनाई हैं जिनका उद्देश्य केवल अल्पकालिक विकास नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था को सरल बनाने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने जैसे कदमों का लाभ आने वाले वर्षों में और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
निर्मला सीतारमण के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू मांग देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में से एक है। उन्होंने कहा कि जब मध्यम वर्ग की आय, क्रय शक्ति और निवेश क्षमता बढ़ती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव ऑटोमोबाइल, आवास, उपभोक्ता वस्तुओं, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनेक क्षेत्रों पर पड़ता है। इससे उद्योगों का विस्तार होता है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और सूक्ष्म उद्यमों के लिए भी नए अवसर तैयार किए हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल अवसंरचना आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल आर्थिक विकास दर बढ़ाने पर नहीं, बल्कि विकास के लाभों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर भी है। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश जैसे कदमों से समावेशी विकास (Inclusive Growth) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का मध्यम वर्ग आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता वर्गों में शामिल होगा। बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और वित्तीय समावेशन के कारण घरेलू उपभोग लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनियां भी भारत को एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देख रही हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को और मजबूत करने के लिए रोजगार सृजन, महंगाई पर नियंत्रण और आय वृद्धि पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक होगा। यदि इन क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति जारी रहती है, तो भारत की आर्थिक विकास दर को लंबे समय तक मजबूती मिल सकती है।
वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत अगले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों की गति बनाए रखने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और वैश्विक निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार मजबूत मध्यम वर्ग, स्थिर आर्थिक नीतियां और तेज़ी से विकसित होती डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की विकास यात्रा के प्रमुख आधार बने रहेंगे।
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