Last updated: July 5th, 2026 at 06:32 pm

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 5 जुलाई से शुरू होने वाले अपने महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका) और बेल्जियम का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता को मजबूत करने, द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस दौरे के दौरान विदेश मंत्री विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं, विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। वार्ताओं में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। भारत का प्रयास है कि पश्चिम एशिया, यूरोप और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भविष्य की सदस्यता के लिए समर्थन प्राप्त करना भी है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। सरकार का मानना है कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और लोकतांत्रिक देशों के साथ मजबूत संबंध इस अभियान को और मजबूती देंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के संबंध केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। खाड़ी क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत के लिए यह क्षेत्र व्यापार तथा निवेश का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका और बेल्जियम की यात्रा भी कई कारणों से अहम है। अमेरिका भारत का प्रमुख रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा तथा उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं बेल्जियम, यूरोपीय संघ की प्रमुख संस्थाओं का केंद्र होने के कारण भारत-यूरोप संबंधों के लिए विशेष महत्व रखता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी विदेश नीति को बहुआयामी बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों के बीच भारत संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में विदेश मंत्री की यह यात्रा भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आर्थिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने, व्यापार बढ़ाने और नई तकनीकों में सहयोग प्राप्त करने पर लगातार जोर दे रहा है। विभिन्न देशों के साथ होने वाली बैठकों में निवेश, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह बहु-देशीय यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस दौरे के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों और समझौतों पर देश और दुनिया की नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति, आर्थिक हितों और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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