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सहरसा में कोसी के तेज बहाव से 20 फीट सड़क टूटी, कई गांवों का आवागमन प्रभावित

  बिहार के सहरसा जिले में कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव का असर अब गांवों की सड़कों
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    बिहार के सहरसा जिले में कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव का असर अब गांवों की सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। सलखुआ प्रखंड क्षेत्र में कोसी का पानी खेत-खलिहानों से होते हुए गांवों की मुख्य सड़कों तक पहुंच गया है। तेज बहाव के कारण पचखुटिया से बनगामा जाने वाली मुख्य सड़क का करीब 15 से 20 फीट हिस्सा बह गया, जिसके बाद आसपास के कई गांवों के लोगों के सामने आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।

     

    बताया गया कि सड़क का यह हिस्सा रविवार सुबह कोसी के तेज बहाव की चपेट में आया। इससे पहले शनिवार शाम तक सड़क सामान्य स्थिति में थी। अगले दिन जब ग्रामीणों ने सड़क की स्थिति देखी तो उसका एक बड़ा हिस्सा पानी के बहाव में टूटकर बह चुका था। सड़क टूटने के बाद आसपास के खेतों और निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी फैल गया।

     

    यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ग्रामीणों के अनुसार, पचखुटिया से बनगामा जाने वाला यह मार्ग उटेशरा, सितुआहा पंचायत और साम्हरखुर्द के घोरमाहा समेत कई इलाकों को जोड़ता है। इसके अलावा कोसी बांध के पास से पचखुटिया, बनगामा, पचभिरा, ताजपुर, फलस्वान और घोरमाहा जैसे गांवों तक पहुंचने के लिए भी इस मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। सड़क का हिस्सा टूटने के बाद इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

     

    सड़क टूटने के बाद कुछ स्थानों पर ग्रामीणों को पानी और तेज धारा के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे खासकर बुजुर्गों, बच्चों और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों के सामने परेशानी बढ़ गई है। सामान्य आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाला मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

     

    बाढ़ के पानी का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। आसपास के खेतों में भी पानी फैलने से कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं। खेतों में पानी भरने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका है। इसके साथ ही पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार, कई स्थानों पर खेत और चारे का भंडार पानी की चपेट में आ गया है।

     

    सहरसा के तटबंध के भीतर बसे कई गांवों में कोसी के जलस्तर बढ़ने के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। नौला, हाटी, बकुनिया, केदली और आसपास की पंचायतों में सड़क, विद्यालय और अन्य सार्वजनिक स्थान भी प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर लोगों को छोटी नावों के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है। कुछ विद्यालय परिसरों में भी पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई है।

     

    जलभराव के कारण स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रभावित हुए हैं। हाटी पंचायत के प्राथमिक विद्यालय देवका और मुरलीपुर के विद्यालय परिसर में पानी जमा होने से छात्र-शिक्षकों को परेशानी हो रही है। वहीं डरहार पंचायत के प्राथमिक विद्यालय महुआ चाही और केदली पंचायत के मध्य विद्यालय रामपुर छतवन में भी पानी पहुंचने की जानकारी है। केदली पंचायत के बगहा खाल गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में भी जलभराव हुआ है।

     

    बाढ़ की स्थिति के बीच पशुपालकों के सामने चारे का संकट भी गंभीर होता जा रहा है। पानी में खेतों की फसल और पहले से रखा पशुचारा प्रभावित होने के कारण पशुओं को भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में पशुचारा उपलब्ध कराने की मांग की है।

     

    प्रभावित लोगों की ओर से प्रशासन से टूटे हुए सड़क हिस्से पर जल्द से जल्द आवागमन की व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए नाव, पॉलीथिन शीट, खाद्य सामग्री और पशुचारे जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठी है। स्थानीय स्तर पर प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत बताई जा रही है।

     

    सहरसा में कोसी की स्थिति बिहार के दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों से भी जुड़ी हुई है। राज्य के आधिकारिक बाढ़ आंकड़ों में कोसी, गंडक और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर चेतावनी या खतरे के स्तर के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया है। सहरसा और सुपौल के कई प्रखंडों में भी बाढ़ का प्रभाव दर्ज किया गया है।

     

    सहरसा के प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क बहाल करने के साथ-साथ लोगों और पशुओं को सुरक्षित रखना है। कोसी नदी के जलस्तर और बहाव में बदलाव के बीच प्रशासन के लिए तटबंध के भीतर बसे गांवों में लगातार निगरानी और राहत व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

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