Last updated: October 17th, 2026 at 12:54 pm

हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में कृषि विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई में कथित नकली खाद की 820 बोरियां बरामद की गई हैं। यह खेप हरियाणा के हिसार से लाकर जिले में खपाने की तैयारी की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान एक किसान सेवा केंद्र के गोदाम और वहां माल उतार रहे ट्रक की जांच की गई। मौके से बरामद खाद को जब्त कर लिया गया है और उसके नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। मामले में किसान सेवा केंद्र के संचालक समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। <Cite refs={[“turn590167search0”]}/>
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के नेतृत्व में टीम ने विशेष टास्क फोर्स के अधिकारियों के साथ जिले में खाद की संदिग्ध खेप पहुंचने की सूचना पर कार्रवाई की। जांच के दौरान बहिरमा स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र के गोदाम और ट्रक से खाद की बोरियां बरामद हुईं। अधिकारियों को संदेह था कि बाहर से लाई गई खाद को स्थानीय बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही थी। इसके बाद टीम ने खाद की पहचान, उसके पैकेटों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
कार्रवाई में कुल 820 बोरियां मिलीं। इनमें 45 बोरियां गोदाम के अंदर रखी थीं, जबकि 775 बोरियां ट्रक से उतारी जा रही थीं। बरामद सामग्री में भारत डीएपी ब्रांड के पैकेट भी शामिल थे। अधिकारियों ने खाद की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि के लिए नमूने एकत्र किए। कृषि विभाग के अनुसार, कुल आठ नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही खाद की गुणवत्ता और उसके मानकों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
इस मामले में किसान सेवा केंद्र के संचालक कुलदीप, हरियाणा के हिसार क्षेत्र से जुड़े कृष्ण सुदामा, रजनीश और अखिलेश कुमार को नामजद किया गया है। जिला कृषि अधिकारी की शिकायत के आधार पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की शुरुआत है; मामले में संबंधित लोगों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
प्रशासन की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब किसान रबी की फसलों की तैयारी में जुटने लगते हैं। इस मौसम में गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की बुवाई से पहले खाद की मांग बढ़ जाती है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बाजार में घटिया या मिलावटी खाद पहुंचती है, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और फसलों की वृद्धि पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
डीएपी यानी डाइ-अमोनियम फॉस्फेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से फसलों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। किसान बुवाई के समय इसका उपयोग करते हैं, इसलिए इसकी गुणवत्ता में गड़बड़ी होने पर फसल के शुरुआती विकास पर असर पड़ सकता है। नकली या मानकों पर खरी न उतरने वाली खाद की बिक्री किसानों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। इसी कारण उर्वरक के निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है।
कृषि विभाग और प्रशासन के सामने अब बरामद खाद के स्रोत, उसकी गुणवत्ता और वितरण नेटवर्क की जांच करना अहम होगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि खेप किन दस्तावेजों के आधार पर लाई गई थी और क्या उसे स्थानीय दुकानों तक पहुंचाया जाना था। प्रयोगशाला रिपोर्ट से खाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हरदोई की इस कार्रवाई के बाद किसानों को भी खाद खरीदते समय सतर्क रहने की जरूरत है। उन्हें अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदना चाहिए, बिल लेना चाहिए और पैकेट पर दर्ज ब्रांड, बैच नंबर तथा अन्य विवरणों की जांच करनी चाहिए। खाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर कृषि विभाग को शिकायत दी जा सकती है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध खाद की बिक्री रोकना और किसानों को संभावित नुकसान से बचाना है।
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