Last updated: June 29th, 2026 at 03:55 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा अनियमितता के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए चंदे के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए उनके बयानों को राजनीतिक बताया और उन्हें मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए चंदे को लेकर जनता के मन में सवाल हैं और पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया और कहा कि जनता को प्रत्येक दान का पूरा हिसाब मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष आस्था के विषयों का राजनीतिकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर गंभीर हैं, तो उन्हें मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन का भी खुलकर समर्थन करना चाहिए। योगी ने दावा किया कि भाजपा सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी मंदिर ट्रस्ट का बचाव करते हुए कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर इस्तीफे का कोई दबाव नहीं है। संगठन ने विपक्ष पर मंदिर से जुड़े मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया और कहा कि यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कानून के अनुसार होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल मंदिर ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों दलों के बीच बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की राजनीति बता रहा है, जबकि विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर कायम है। आने वाले समय में इस मुद्दे की राजनीतिक और कानूनी दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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