Last updated: June 30th, 2026 at 07:12 am

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) बृजेश सिंह चर्चा में हैं। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हुए अपनी राजनीतिक सक्रियता के नए संकेत दिए हैं। हालांकि उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किस विधानसभा क्षेत्र या किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बृजेश सिंह का झुकाव लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए गठबंधन की ओर रहा है। उनके परिवार के कई सदस्य भाजपा से जुड़े रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि वे एनडीए के किसी सहयोगी दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं। इस बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से उनके संभावित जुड़ाव की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं।
इन दिनों बृजेश सिंह वाराणसी और पूर्वांचल में सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे काशी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य से भी जुड़े हुए हैं। वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का रास्ता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उचित समय पर अपनी चुनावी रणनीति और सीट की घोषणा करेंगे।
उन्होंने अपने बेटे सिद्धार्थ सिंह के जौनपुर से चुनाव लड़ने की चर्चाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
बृजेश सिंह के परिवार का पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके बड़े भाई उदयभान सिंह और पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी विधान परिषद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उनके भतीजे सुशील सिंह लगातार चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं।
बृजेश सिंह का नाम पूर्वांचल की राजनीति में मुख्तार अंसारी के साथ लंबे समय तक चली राजनीतिक और आपराधिक प्रतिद्वंद्विता को लेकर भी चर्चा में रहा है। उनके खिलाफ विभिन्न गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज रहे और वर्ष 2008 में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने लंबा समय जेल में बिताया। वर्ष 2022 में रिहा होने के बाद अब उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
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