Last updated: July 6th, 2026 at 12:07 pm

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। हाल के दिनों में मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई जांच के बाद यह ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक है। माना जा रहा है कि बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट, मंदिर प्रशासन में सुधार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नए पद के गठन और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
ट्रस्ट की यह बैठक अयोध्या के मणिराम दास छावनी में आयोजित की जा रही है। आधिकारिक एजेंडा के अनुसार, बैठक में सबसे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। दोनों नेताओं के नाम दान गड़बड़ी विवाद के बाद चर्चा में आए थे, हालांकि अब तक उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण विषय मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर एसआईटी द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। जांच एजेंसियों ने अब तक दान राशि के कथित गबन के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस और एसआईटी दोनों समानांतर जांच कर रही हैं। जांच के दौरान आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव पर भी विचार कर सकता है। बैठक के एजेंडे में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी अधिक पेशेवर तरीके से संचालित की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकती है।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025–26 के अनऑडिटेड आय-व्यय विवरण, बैलेंस शीट और अन्य वित्तीय दस्तावेजों पर भी चर्चा की जाएगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत इन दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आवश्यक स्वीकृतियां दी जा सकती हैं। वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करना इस बैठक की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है, जबकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट का उद्देश्य श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना और मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था में उच्च स्तर की पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि इस बैठक में प्रशासनिक सुधारों और आधुनिक वित्तीय निगरानी प्रणाली से जुड़े फैसले लिए जाते हैं, तो इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सकती है।
देशभर की निगाहें इस बैठक के निर्णयों पर टिकी हुई हैं। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट का रुख, एसआईटी रिपोर्ट पर चर्चा और CEO पद के गठन जैसे मुद्दों पर लिए गए फैसले न केवल मंदिर प्रशासन बल्कि व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित कर सकते हैं। बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।
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