Last updated: July 6th, 2026 at 12:49 pm

भारत सरकार ने Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर के रोलआउट पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर इस फीचर का विस्तृत तकनीकी और नीतिगत स्पष्टीकरण देने को कहा है। जब तक सरकार के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इस फीचर को लागू नहीं किया जाएगा।
WhatsApp जिस फीचर को लाने की तैयारी कर रहा था, उसके तहत उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल एक यूनिक Username के माध्यम से अन्य लोगों से जुड़ सकते हैं। Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी, क्योंकि हर बातचीत में फोन नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि भारत सरकार का मानना है कि इस सुविधा का दुरुपयोग भी किया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और सरकारी अधिकारियों या बैंकों की पहचान का दुरुपयोग है। आशंका जताई गई है कि यदि कोई व्यक्ति किसी प्रसिद्ध संस्था या अधिकारी से मिलता-जुलता Username बना लेता है, तो साइबर अपराधियों के लिए लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। इसी कारण सरकार ने Meta से पूछा है कि इस तरह के जोखिमों को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि वह फीचर के तकनीकी ढांचे, यूजर सत्यापन प्रणाली और सुरक्षा उपायों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी स्पष्ट करे कि भारतीय कानूनों और आईटी नियमों का पालन इस फीचर के साथ किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यक स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो आगे नियामकीय कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
दूसरी ओर Meta का कहना है कि Username फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, प्रसिद्ध व्यक्तियों और संस्थानों की पहचान की सुरक्षा, स्पैम नियंत्रण तथा दुरुपयोग रोकने के लिए विशेष व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। Meta का यह भी कहना है कि यह फीचर अभी चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है और पूरी तरह लॉन्च नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है और यहां करोड़ों लोग व्यक्तिगत, व्यावसायिक तथा सरकारी संचार के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े फीचर को लागू करने से पहले सुरक्षा, गोपनीयता और साइबर अपराध से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए, तो यह सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
डिजिटल अधिकारों से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि Username जैसी सुविधा उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को बेहतर बना सकती है, क्योंकि इससे हर व्यक्ति को अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना पड़ेगा। वहीं सरकार का पक्ष है कि नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
भारत में WhatsApp का Username फीचर रोक दिया गया है और सभी की नजर Meta की प्रतिक्रिया तथा सरकार के अगले फैसले पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है और आवश्यक सुरक्षा उपायों पर भरोसा कायम होता है, तो भविष्य में इस फीचर को संशोधित स्वरूप में भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। तब तक यह मामला भारत की डिजिटल नीति, साइबर सुरक्षा और टेक कंपनियों के नियमन से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाओं में बना रहने की संभावना है।
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