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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, वैश्विक संकेतों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों से बढ़ा भरोसा

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors – FIIs) की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे
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भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors – FIIs) की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में उल्लेखनीय निवेश किया है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी 50 को मजबूती मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

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    हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा (Risk Appetite) बेहतर हुई है। अमेरिका और यूरोप में मुद्रास्फीति के आंकड़ों में नरमी तथा प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के संकेतों से उभरते बाजारों में निवेश का माहौल मजबूत हुआ है। इसका सकारात्मक असर भारत सहित कई एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला है।

    विश्लेषकों के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक विकास दर, बढ़ता घरेलू उपभोग, मजबूत बैंकिंग प्रणाली और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण (Manufacturing), रक्षा उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी वैश्विक फंडों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी का सबसे अधिक लाभ बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल, पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में सूचीबद्ध कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हाल के दिनों में तेजी दर्ज की गई है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की लगातार खरीदारी भी बाजार को अतिरिक्त समर्थन प्रदान कर रही है।

    हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि, डॉलर की मजबूती या प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति में बदलाव जैसे कारक बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए निवेशकों को केवल अल्पकालिक तेजी देखकर निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत में कॉर्पोरेट आय (Corporate Earnings) मजबूत रहती है और सरकार आर्थिक सुधारों की गति बनाए रखती है, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और बढ़ सकता है। इससे शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये और पूंजी बाजार को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लंबे समय का आकर्षक बाजार बना हुआ है। बड़ी युवा आबादी, तेज शहरीकरण, डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में रखती हैं।

    फिलहाल विदेशी निवेशकों की वापसी ने भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कंपनियों के तिमाही नतीजे और आर्थिक आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करेंगे। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि विदेशी निवेश का यह रुझान कितना टिकाऊ साबित होता है।

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