Last updated: July 6th, 2026 at 01:06 pm

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय अंतरिक्ष भवन को सोमवार को एक बार फिर ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं। धमकी मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंच गए तथा पूरे परिसर की गहन तलाशी शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिन पहले भी ISRO से जुड़े एक कार्यालय को इसी तरह की धमकी मिली थी, जो बाद में फर्जी साबित हुई थी। उस मामले में जांच एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश से एक आरोपी की पहचान कर कार्रवाई की थी। लगातार दूसरी बार इस तरह की धमकी मिलने से सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए साइबर जांच भी तेज कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमकी वाला ईमेल मिलते ही मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया। भवन में मौजूद कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई और पूरे परिसर की चरणबद्ध तरीके से जांच की गई। साथ ही ईमेल भेजने वाले की पहचान के लिए साइबर विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ईमेल किस सर्वर या नेटवर्क से भेजा गया और इसके पीछे किसी व्यक्ति या संगठित समूह का हाथ है या नहीं।
ISRO भारत की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। चंद्रयान, आदित्य-एल1, गगनयान और कई उपग्रह मिशनों की सफलता के बाद संगठन की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है। ऐसे में संगठन को मिलने वाली किसी भी सुरक्षा धमकी को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक संस्थानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा केवल भौतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि साइबर स्तर पर भी लगातार मजबूत की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में फर्जी बम धमकियों और साइबर माध्यमों से भेजे जाने वाले धमकी भरे संदेशों की संख्या बढ़ी है। भले ही इनमें से अधिकांश मामले झूठे निकलते हों, लेकिन प्रत्येक सूचना पर पूरी गंभीरता से कार्रवाई करना आवश्यक होता है। इससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सकता है और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ISRO जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ईमेल ट्रैकिंग, डिजिटल फॉरेंसिक और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही अन्य संवेदनशील सरकारी संस्थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत के वैज्ञानिक और रणनीतिक संस्थानों को निशाना बनाकर भेजी जाने वाली इस प्रकार की धमकियां केवल सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा नहीं हैं, बल्कि लोगों में भय का माहौल बनाने का भी प्रयास हो सकती हैं। इसलिए तकनीकी जांच, त्वरित कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाना बेहद जरूरी है।
फिलहाल ISRO के बेंगलुरु मुख्यालय में स्थिति सामान्य है और वैज्ञानिक गतिविधियां पहले की तरह जारी हैं। हालांकि जांच एजेंसियां मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं और ईमेल भेजने वाले की पहचान करने का प्रयास जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
![]()
Comments are off for this post.